Zero FIR और Regular FIR में क्या अंतर है? अक्सर शिकायत दर्ज कराने वाले कर देते हैं ये गलती

कानून जानकारी सिर्फ उससे जुड़े लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी उतनी ही जरूरी है. अक्सर जब कोई अनहोनी होती है तो लोग इस बात को लेकर परेशान हो जाते हैं कि शिकायत करने किस पुलिस स्टेशन जाएं. क्या पुलिस हमारी रिपोर्ट लिखेगी या नहीं? लोग अक्सर जीरो एफआईआर (Zero FIR) और रेगुलर एफआईआर (Regular FIR) के बीच में फंस जाते हैं और समझ नहीं पाते हैं कि क्या करना सही रहेगा. तो आज हम आपकी इस परेशानी का हल बताने वाले हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और इमरजेंसी में आपकी मदद कैसे कर सकती हैं.

difference between zero fir and regular fir
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जीरो FIR क्या होती है?

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अगर कोई कहीं सफर कर रहा है और उसके साथ कोई गंभीर हादसा जैसे कोई एक्सीडेंट, चोरी या फिर हमला हो जाता है. अब आपको नहीं पता है कि वह इलाका किस पुलिस स्टेशन के अंदर आता है. ऐसे में जीरो एफआईआर ही काम आती है. इसका मतलब है कि आप जहां हैं, वहीं के लोकल थाने में आकर अपनी शिकायत कर सकते हैं.

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जीरो FIR में क्या-क्या होता है?

जीरो FIR में क्या-क्या होता है?3 / 6

जीरो एफआईआर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अपराध कहीं भी हुआ हो, आप अपने पास के किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत लिखवा सकते हैं. पुलिस यह कहकर आपको मना नहीं कर सकती है कि 'यह हमारे इलाके का केस नहीं है.' इसे 'जीरो एफआईआर' इसलिए कहते हैं क्योंकि उस समय पुलिस इसे कोई रेगुलर नंबर नहीं देती है बल्कि '0' नंबर डालकर आपकी रिपोर्ट लिख लेती है.

जीरो FIR क्यों है जरूरी?

जीरो FIR क्यों है जरूरी?4 / 6

शिकायत लिखने के बाद वह पुलिस स्टेशन उस FIR को उस इलाके के थाने में भेज देता है, जहां असल में क्राइम हुआ था. असली जांच वहीं से शुरू होती है. यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह गंभीर अपराधों जैसे रेप या मर्डर के लिए होती है, ताकि पुलिस तुरंत एक्शन ले सके और देरी की वजह से कोई सबूत न मिट जाए.

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रेगुलर FIR क्या होता है?

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यह वह सामान्य प्रक्रिया है, जिसके बारे में हम अक्सर फिल्मों में देखते हैं या सुनते हैं. रेगुलर एफआईआर उसी पुलिस स्टेशन में दर्ज होती है जिसके अधिकारल क्षेत्र (Jurisdiction) में अपराध हुआ है. यहां पुलिस रिपोर्ट लिखते ही अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर देती है. इसमें FIR को एक प्रॉपर नंबर दिया जाता है, जैसे- FIR No. 125/2026.

रेगुलर FIR और जीरो FIR किस सेक्शन में आते हैं?

रेगुलर FIR और जीरो FIR किस सेक्शन में आते हैं?6 / 6

रेगुलर FIR पहले CRPC के सेक्शन 154 में था, जो अब बदलकर BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के सेक्शन 173 में है. वही कानून की किताबों में जीरो FIR जैसा कोई शब्द नहीं है. साल 2012 में हुए निर्भया केस के बाद जब जस्टिस वर्मा कमेटी बनी, तब यह कांसेप्ट सामने आया. कोर्ट ने माना कि पुलिस की इस लापरवाही को खत्म करना जरूरी है. इसी न्यायिक व्याख्या (Judicial Interpretation) के बाद जीरो एफआईआर का कांसेप्ट आई.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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