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खबरों के मुताबिक, चंडी प्रसाद खमारी नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत की कि 2024 में उनकी ट्रेन लगभग सात घंटे देरी से चली। इस देरी के कारण उनकी पहले से बुक की गई फ्लाइट छूट गई। खमारी ने 23 अगस्त, 2024 के लिए झारसुगुड़ा से हावड़ा के लिए ट्रेन टिकट बुक किया था। रेलवे के समय के अनुसार, ट्रेन को शाम 7:50 बजे प्रस्थान करना था और सुबह 3:55 बजे हावड़ा पहुंचना था। इस समय सारिणी के आधार पर, खमारी ने गुवाहाटी के लिए एक फ्लाइट बुक की थी, जो सुबह 8:05 बजे रवाना होने वाली थी। इसका मतलब था कि ट्रेन से पहुंचने और फ्लाइट से रवाना होने के बीच लगभग चार घंटे का अंतर था।
ट्रेन सात घंटे लेट

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ट्रेन झारसुगुडा से दो घंटे देरी से रवाना हुई और कोलकाता लगभग सात घंटे देरी से पहुंची। इस वजह से उनकी फ्लाइट छूट गई। खमारी ने बताया कि उन्होंने रेलवे से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्हें अपनी फ्लाइट रद्द करनी पड़ी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान और अत्यधिक मानसिक पीड़ा हुई।
रेलवे ने क्या दी दलील

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रेलवे ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वह ट्रेनों के समय पर चलने की कोई गारंटी नहीं देता है। परिचालन कारणों से कभी-कभी देरी हो जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा के लिए वे अकेले जिम्मेदार नहीं हैं, इसलिए पूरी तरह से उत्तरदायी नहीं हैं। हालांकि, उपभोक्ता न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा

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अदालत ने कहा कि रेलवे एक सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था है और ट्रेनों में देरी के लिए उसे ज़िम्मेदार होना चाहिए, जब तक कि वह यह साबित न कर दे कि स्थिति उसके नियंत्रण में नहीं थी। अदालत ने यह भी कहा कि रेलवे यह साबित करने में विफल रहा कि देरी किसी महत्वपूर्ण या असाधारण कारण से हुई थी।
मुआवजा आदेश

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उपभोक्ता न्यायालय ने स्वीकार किया कि ट्रेन में अत्यधिक देरी के कारण यात्री की उड़ान छूट गई, जिससे उसे भारी नुकसान और मानसिक पीड़ा हुई। न्यायालय ने रेलवे को उड़ान छूटने के लिए 20,000 रुपये, मानसिक पीड़ा के लिए 30,000 रुपये और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो प्रति दिन 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। रेलवे समय पर भुगतान करने में विफल रहा, जिसके परिणामस्वरूप जुर्माना बढ़कर लगभग 1.3 लाख रुपये हो गया।