
1 / 9
दुनिया में कुछ ऐसे अनोखे जानवर भी हैं जो आंखें बंद होने के बावजूद अपने आसपास की चीजों को महसूस कर लेते हैं. ये अपनी खास क्षमताओं जैसे इकोलोकेशन, कंपन महसूस करना और ट्रांसपेरेंट पलकों की मदद से वो देख पाते हैं, जो खुली आंखों से भी नहीं दिखाई देता.
चमगादड़

2 / 9
चमगादड़ इकोलोकेशन तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. ये आवाज की तरंगें छोड़ते हैं और उनकी गूंज से आसपास की चीजों का पता लगाते हैं. इस वजह से ये आंखें बंद होने पर भी आसानी से रास्ता ढूंढ लेते हैं.
डॉल्फिन

3 / 9
डॉल्फिन भी चमगादड़ की तरह इकोलोकेशन का इस्तेमाल करती हैं. ये पानी के अंदर क्लिक जैसी आवाज निकालती हैं और उसके लौटने से शिकार और रास्ते का अंदाजा लगाती हैं.
सांप

4 / 9
सांपों की आंखों पर एक पारदर्शी परत (spectacle) होती है, जिससे वो बिना पलक झपकाए भी देख सकते हैं. यानी तकनीकी रूप से उनकी आंखें हमेशा बंद रहती हैं, फिर भी वो देख पाते हैं.
ऊंट

5 / 9
ऊंट के पास तीन पलकें होती हैं, जिनमें एक पारदर्शी होती है. ये धूल-भरी आंधी में भी आंखों की सुरक्षा करते हुए उन्हें देखने में मदद करती है.
उल्लू

6 / 9
उल्लू की सुनने की क्षमता बेहद तेज होती है. ये आवाज के आधार पर अपने शिकार की सटीक लोकेशन पहचान सकता है, जिससे ये अंधेरे या आंखें बंद होने पर भी सब महसूस कर सकता है.
पिट वाइपर

7 / 9
इस सांप के पास हीट सेंसिंग पिट ऑर्गन होते हैं, जो गर्म खून वाले जीवों की गर्मी को पहचान लेते हैं. इससे ये बिना आंखों के इस्तेमाल के भी शिकार को ढूंढ लेता है.
गिरगिट

8 / 9
गिरगिट की आंखों की पलकों पर एक छोटा सा छेद होता है. गिरगिट इसी छेद के जरिए आंखें बंद होने के बावजूद भी देख सकता है.
स्किंक

9 / 9
स्किंक एक तरह की छिपकली होती है. इसकी खास बात ये है कि इसकी आंखों पर एक पारदर्शी पलक होती है. जब ये अपनी आंखें बंद करती है, तब भी इस पारदर्शी परत की वजह से बाहर देख सकती है.
(All Photos Credit: Freepik)
इससे इसे दो फायदे मिलते हैं—आंखें सुरक्षित रहती हैं और देखने में भी कोई परेशानी नहीं होती। इसलिए स्किंक धूल-मिट्टी या झाड़ियों में आसानी से रह लेती है।