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पाकिस्तान में शादी की रस्मों की वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है. बहुत कम लोग जानते होंगे कि पाकिस्तान में शादी की कई ऐसी अजीबोगरीब रस्में है, जिसके बारे में जानकर आपकी भी हंसी छूट जाएगी.
खीर चाटने वाली रस्म

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पाकिस्तान के कई घरों में शादी के दौरान दुल्हन की हथेली पर थोड़ी खीर डाल दी जाती है, जिसे दूल्हा अपनी जुबान से चाटने लगते हैं. यह रस्म सिर्फ खाने की नहीं, बल्कि नए जोड़े के बीच शर्म कम करने और आपसी जरूरत‑मजाक बढ़ाने के लिए की जाती है.
दुल्हन के दुपट्टा पर नमाज़

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एक और अजीबो‑गरीब रस्म में दुल्हन को फर्श पर बैठा दिया जाता है और उसका चौड़ा दुपट्टा उसके नीचे फैला दिया जाता है, जिसे दूल्हा अपनी 'जामा नमाज़' के लिए मोहर्रम‑सा मोटे कालीन बना लेता है. इस दौरान वह दो रकात नफल पढ़ता है, जो उसकी नई जिंदगी के लिए शुक्र और दुआ का रूप ले लेती है.
उबटन और दाल‑तेल की जमानती रस्म

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शादी से पहले दुल्हन के चेहरे‑हाथ‑पैर पर हल्दी, बेसन और पानी का उबटन घना कर लगा दिया जाता है, जिससे उसकी त्वचा चमकेली और निखरी बन जाए. इसके साथ‑साथ उसकी बालों में इतना सरसों या घी का तेल लगा दिया जाता है कि उसके बाल चमकने लगते हैं और आस‑पास की खुशबू भी खुशबूदार हो जाती है.
'सुरमा पुवाई' वाला नाटक

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दूल्हे की नानी या बड़ी बेहन की बहन अक्सर उसकी आंखों में सुरमा लगाते हुए बड़े अंदाज में खड़ी हो जाती है और फिर जोर‑जोर से उससे पैसे या तोहफे मांगती हैं. यह रस्म सिर्फ बेहन जी की जिंदगी‑भर की अपनी महत्वकांक्षा को अलग तरह से दिखाने का मौका है, क्योंकि यह दिखाता है कि घर में बड़ी बहन की पॉजिशन कितनी कांटेदार और नर्म है.
तेल वाले कटोरे को उठाने की चुनौती

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कुछ घरों में शादी के दौरान एक कटोरा तेल से ठूंस दिया जाता है और दूल्हे को उसे उल्टा खड़ा कर उठाने की चुनौती दी जाती है. तेल होने से कटोरा इतना फिसलता है कि दूल्हा कई बार बेहूदा‑सा दिखाई देता है, जबकि दर्शक मजाक‑मजाक में उसकी ताकत पर ही पुचकारा खड़ा कर देते हैं.
पगड़ी या पगर पहनाने का रौब

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पंजाब और उत्तरी‑पाकिस्तान के कई घरों में कबीले‑स्तर पर दूल्हे को एक बड़ी पगार या पगड़ी बांध दी जाती है, जिसे हाथ से टटोलकर फिर सिर पर टिकाया जाता है. यह पगड़ी उस आदमी के लिए 'आदमी होने का टैग' बन जाती है, जो अब जिम्मेदारी और लिंग‑संबंधित रौब को एक साथ चलाएगा.
दोस्तों की 'दूध‑पी' दौड़

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कई घरों में दुल्हन की सीट से उठने के बाद उसके दोस्त, बहन और कजिन एक‑दूसरे से आगे बढ़कर उस सीट पर बैठने की होड़ मचा देती हैं, क्योंकि कहा जाता है कि जो पहले बैठती है, वही अगली बार शादी में बारी बनेगी. इसी तरह दूल्हे के दोस्तों की एक दूध का गिलास या कटोरे में दूध के साथ दौड़ लग जाती है, ताकि जो पहला घूंट ले सके, वही अगली शादी में दूल्हा या भागीदार बन जाए.
नन्ही‑सी देवर की शर्त

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आखिरी रूप से एक रस्म को 'गोड़‑बिठाई' कहा जाता है, जहां देवर को दुल्हन की गोद पर बैठाया जाता है या वह अपना हाथ उसकी जांघ पर रखकर दुल्हन से कुछ पैसे या गिफ्ट मांगता है. यह रस्म दोनों पक्षों में छिपी नई‑पुरानी रिवाल्वर को एक‑दूसरे की बाज़ू में दिखाने का एक तरह का नाटक है, क्योंकि इसमें देवर की छोटी‑सी आवाज, बिछौने वाली की मुस्कान और दुल्हन की थोड़ी शर्म एक साथ आकर बैठ जाती हैं.