RERA Act Construction Quality Rules: सोचिए, क्या हो अगर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने और भारी-भरकम लोन चुकाने के बावजूद आपको ऐसा घर मिले जिसकी दीवारों में कुछ ही महीनों में दरारें आ जाएं या छत से पानी टपकने लगे? अच्छी बात यह है कि इस तरह के मामलों में आप चुप बैठने के बजाय कानून की मदद ले सकते हैं. रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 (RERA) खरीदारों को ऐसे डेवलपर्स के खिलाफ कड़े कदम उठाने का अधिकार देता है. क्या कहता है RERA कानून? जानें अपने अधिकार?
बिल्डर को लिखित शिकायत दें

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यदि आपके घर में क्वालिटी से जुड़ी समस्या है, तो आप सबसे पहले बिल्डर को लिखित शिकायत दें. नियम के अनुसार, बिल्डर को 30 दिनों के भीतर बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के उस खराबी को दूर करना होगा. अगर बिल्डर 30 दिनों में समस्या नहीं सुलझाता, तो खरीदार मुआवजे का दावा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है.
5 साल तक बिल्डर की है जवाबदेही

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रेरा की धारा 14(3) खरीदारों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है. इसके तहत अगर पजेशन (कब्जा) मिलने के 5 साल के भीतर घर में किसी भी तरह की स्ट्रक्चरल खराबी (जैसे दरारें, लीकेज या घटिया निर्माण) पाई जाती है, तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी बिल्डर की होती है.
फ्लैट पर 1 करोड़ खर्च, फिर भी मिली बदहाली

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हाल ही में नोएडा के एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, जिसने करीब 1 करोड़ रुपये खर्च कर प्रीमियम फ्लैट खरीदा था. वीडियो में दिखा कि बिल्डिंग का प्लास्टर उखड़ रहा है और दीवारों की हालत बेहद खराब है. इस घटना ने पूरे एनसीआर के घर खरीदारों के बीच हलचल मचा दी है.
कैसे करें खुद का बचाव?

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एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले खरीदारों को कुछ बुनियादी जांच जरूर करनी चाहिए. सुनिश्चित करें कि प्रोजेक्ट रेरा के तहत रजिस्टर्ड है. बिल्डर के पिछले प्रोजेक्ट्स और उसकी मार्केट वैल्यू की जांच करें. घर खरीदने से पहले एग्रीमेंट को बारीकी से पढ़ें और निर्माण की क्वालिटी से जुड़ी शर्तों को समझें.