ईरान अमेरिका और इजरायल युद्ध के कारण लगातार तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. भारत में भी हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये का इजाफा किया गया है. जिसके बाद से ही बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों के विरोध में गिग वर्कर हड़ताल पर हैं. पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतों का साफतौर पर असर गिग वर्कर की कमाई पर पड़ेगा. तो अब सवाल ये उठता है कि किसी देश के आम आदमी को पेट्रोल भरवाने के लिए हर महीने अपनी कमाई का कितना हिस्सा खर्च करना पड़ता है. आज हम इसी सवाल का जवाब देंगे.
रिपोर्ट में की गई देशों की तुलना

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बता दें कि ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम द्वारा जारी 'Gasoline Affordability' रिपोर्ट में दुनिया के कई देशों की तुलना की गई है. रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में औसत व्यक्ति की मंथली इनकम का कितना प्रतिशत खर्च होता है. ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज के मुताबिक उसने प्रति व्यक्ति आय के लिए विश्व बैंक से प्रति व्यक्ति GDP पर दिए गए डेटा का उपयोग किया है.
40 लीटर पेट्रोल भरवाने में मासिक आय का कितना होता है खर्च?

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अगर किसी देश में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में एक महीने की कमाई का 10% खर्च होता है तो इसका मतलब है कि एक सामान्य व्यक्ति की महीने की कमाई का दसवां हिस्सा सिर्फ एक टैंक पेट्रोल भरवाने में ही चला जाता है. यानी मान लीजिए अगर किसी की महीने की कमाई 20 हजार रुपये है तो उसके 2000 रुपये पेट्रोल में चले जाते हैं.
पाकिस्तान और नेपाल की स्थिति खराब

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रिपोर्ट में म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल के बारे में भी बताया गया है. भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल में हालात और भी ज्यादा बुरे हैं. इन देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में लोगों की एक महीने की कमाई का 47% से लेकर 52% तक का हिस्सा खर्च हो सकता है. यानी कि इन देशों में पेट्रोल भरवाने में कमाई का लगभग आधा हिस्सा खर्च होता है. इन देशों में लोगों की इनकम भी काफी कम है और पेट्रोल-डीजल महंगा. यही वजह है कि इन देशों में निजी वाहन चलाना आम परिवारों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ भी बन जाता है.
भारत में आपकी कमाई का कितना हिस्सा पेट्रोल में जाता है?

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आपको बता दें कि भारत 'Gasoline Affordability' रिपोर्ट में बहुत ही नीचे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में व्यक्ति की औसत मासिक आय का लगभग 8 से 10% हिस्सा खर्च हो सकता है. यानी भारत में पेट्रोल आम लोगों के बजट पर विकसित देशों की तुलना में बहुत ही ज्यादा असर डालता है.
किन देशों में है पेट्रोल सस्ता और कमाई ज्यादा?

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कतर और कुवैत जैसे देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में मासिक आय का केवल लगभग 1% से 2% हिस्सा ही खर्च होता है. इसी तरह अमेरिका, सऊदी अरब, लग्जमबर्ग भी दुनिया के सबसे बेहतर देशों में शामिल हैं, जहां पेट्रोल आम लोगों की आय के मुकाबले काफी सस्ता माना जाता है. यहां लोगों की औसत आय बहुत ज्यादा और फिर उनके पास घरेलू तेल उत्पादन है जिसके कारण पेट्रोल अन्य देशों के मुकाबले बेहद सस्ता है.
यूरोप में पेट्रोल महंगा, लेकिन लोगों पर असर कम

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नार्वे, स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतें ज्यादा हैं, लेकिन लोगों की इनकम भी बहुत ज्यादा है. इन देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में मासिक आय का लगभग 2 से 4% हिस्सा ही खर्च होता है. इसलिए महंगे पेट्रोल के बावजूद यहां के लोगों पर आर्थिक दबाव कम है.