
1 / 7
नासा के आर्टेमिस-2 मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को टॉयलेट सिस्टम में खराबी का सामना करना पड़ा. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर स्पेस में टॉयलेट कैसे किया जाता है? जानिए अंतरिक्ष की अनोखी व्यवस्था और उससे जुड़ी चुनौतियां.
स्पेस में टॉयलेट सिस्टम में आई खराबी

2 / 7
नासा का आर्टेमिस-2 मिशन 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च हुआ था, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चांद के चारों ओर यात्रा कर रहे हैं. लेकिन इस मिशन के दौरान ओरियन स्पेसक्राफ्ट के टॉयलेट सिस्टम में खराबी आ गई. बताया गया कि यूरिन निकालने वाला सिस्टम सही से काम नहीं कर रहा था, जिससे समस्या बढ़ गई.
करोड़ों का टॉयलेट, फिर भी परेशानी

3 / 7
स्पेसक्राफ्ट में लगा ये टॉयलेट करीब 192 करोड़ रुपये का है, जिसे खास तकनीक से बनाया गया है. इसके बावजूद इसमें तकनीकी खराबी आ गई, जिसकी वजह से वेस्ट टैंक को खाली करने में दिक्कत आने लगी.
बैकअप सिस्टम का लेना पड़ा सहारा

4 / 7
टॉयलेट सिस्टम में खराबी के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को बैकअप विकल्प का इस्तेमाल करना पड़ा. उन्होंने पर्सनल कंटेनर का इस्तेमाल किया, जिससे अस्थायी रूप से समस्या को संभाला गया.
अंतरिक्ष में टॉयलेट जाना क्यों मुश्किल है?

5 / 7
स्पेस में ग्रेविटेशन नहीं होता, इसलिए मल और मूत्र हवा में तैर सकते हैं. इसी वजह से वहां स्पेशल टॉयलेट सिस्टम की जरूरत होती है, जो सब कुछ कंट्रोल कर सके.
वैक्यूम टेक्नोलॉजी से होता है काम

6 / 7
अंतरिक्ष में हाईटेक वैक्यूम टॉयलेट का इस्तेमाल किया जाता है. ये मल और मूत्र को खींचकर अलग-अलग टैंक में जमा करता है, जिससे सफाई बनी रहती है और गंदगी फैलती नहीं है.
छोटे मिशन में इस्तेमाल होते हैं बैग

7 / 7
छोटे मिशनों में कभी-कभी पोर्टेबल बैग का इस्तेमाल किया जाता है. यह सिस्टम सरल होता है लेकिन लंबी अवधि के मिशन के लिए सही नहीं माना जाता.
(All Photos Credit: Social Media)