LPG Cylinder Price Effect: छोटे सिलेंडर की मांग में बड़ी गिरावट क्यों? गैस कंपनियों के उड़े होश

LPG Cylinder Price Effect: इंडियन ऑयल (IOCL) के 'छोटू' और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के 'मुन्ना' जैसे 5 किलोग्राम वाले कमर्शियल व डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडरों की मांग में 80 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है. जानें इसके पीछे की वजह क्या है, जिसे लेकर गैस कंपनियों के भी होश उड़े हैं.

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LPG Cylinder Price Effect: देश में छोटू और मुन्ना जैसे 5 किलो वाले पोर्टेबल एलपीजी सिलेंडरों की डिमांड 80 फीसदी तक गिर गई है. डिस्ट्रीब्यूटर्स के मुताबिक, इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह यह है कि इनकी कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ चुकी हैं. जानिए दिल्ली सहित अन्य शहरों में अब इसके लिए कितने रुपये चुकाने होंगे.

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दोगुने से ज्यादा महंगे हुए छोटे सिलेंडर

दोगुने से ज्यादा महंगे हुए छोटे सिलेंडर2 / 6

दिल्ली में जो 5 किलो वाला छोटा सिलेंडर इस साल मार्च में महज 323 रुपये में मिल रहा था, उसकी कीमत जून में बढ़कर 821.50 रुपये तक पहुंच गई. हालांकि, तेल कंपनियों द्वारा कमर्शियल गैस के दामों में की गई हालिया कटौती के बाद अब दिल्ली में इसकी कीमत करीब 805.50 रुपये है. नए कनेक्शन की कीमतों में भी बड़ा इजाफा हुआ है. दिल्ली में नया FTL सिलेंडर कनेक्शन अब 1,929.50 रुपये का हो गया है, जो जून में 1,765.50 रुपये था. यानी नए कनेक्शन के लिए सीधे 160 रुपये ज्यादा चुकाने होंगे.

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छोटे सिलेंडरों की गिरावट के पीछे 3 मुख्य कारण

छोटे सिलेंडरों की गिरावट के पीछे 3 मुख्य कारण3 / 6

छोटे सिलेंडरों की इस बड़ी गिरावट के पीछे का मुख्य कारण 14.2 किलोग्राम वाले पारंपरिक घरेलू सिलेंडर की तुलना में 5 किलो वाले सिलेंडर का अपेक्षाकृत महंगा होना देश में घरेलू गैस पाइपलाइन (PNG) का तेजी से विस्तार और 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के तहत बड़े सिलेंडरों तक गरीब परिवारों की आसान पहुंच है. इसके चलते प्रवासियों, छात्रों और छोटे दुकानदारों ने इस छोटे सिलेंडर से दूरी बना ली है.

बिना एड्रेस प्रूफ के मिलते हैं छोटे सिलेंडर

बिना एड्रेस प्रूफ के मिलते हैं छोटे सिलेंडर4 / 6

जब सरकारी तेल कंपनियों ने इन छोटे सिलेंडरों को बिना एड्रेस प्रूफ के किराना दुकानों और पेट्रोल पंपों पर बेचने की शुरुआत की थी, तब इनका मुख्य टारगेट प्रवासी मजदूर, छात्र और रेहड़ी-पटरी वाले थे. कंपनियों को उम्मीद थी कि कम एकमुश्त पैसे के कारण लोग इसे हाथों-हाथ लेंगे, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट निकली.

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कैसे घाटे का सौदा बने छोटे सिलेंडर

कैसे घाटे का सौदा बने छोटे सिलेंडर5 / 6

प्रतिस्पर्धी विश्लेषण और रिटेल मार्केट सर्वे से पता चलता है कि इन छोटे सिलेंडरों पर रीफिलिंग कॉस्ट और लॉजिस्टिक्स खर्च बहुत अधिक आता है. कंपनियों को प्रत्येक 5 किलो के सिलेंडर को रिफिल करने और ट्रांसपोर्ट करने के लिए लगभग उतना ही मैनपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर लगाना पड़ता है जितना 14.2 किलो के लिए. इस वजह से ये सिलेंडर कंस्यूमर्स के लिए घाटे का सौदा बन गए.

क्या कहते हैं एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन फेडरेशन के प्रेसिडेंट

क्या कहते हैं एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन फेडरेशन के प्रेसिडेंट6 / 6

ऑल-इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन फेडरेशन के प्रेसिडेंट जगदीश राज के मुताबिक, कीमतों में इस बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण इन सिलेंडरों को बढ़ावा देने का मकसद ही खत्म हो गया है. अब लोग इसे रिफिल कराने नहीं आ रहे हैं, क्योंकि प्रति किलो के हिसाब से देखें तो यह छोटा सिलेंडर 19 किलो वाले बड़े कमर्शियल सिलेंडर से भी महंगा पड़ रहा है.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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