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जिला वन पदाधिकारी ने बताया कि पिछले सात माह में हाथियों के झुंड ने पांच बार चकाई, सोनो, झाझा, खैरा और जमुई प्रखंड के विभिन्न गांवों में दस्तक दी. इस दौरान फसलें, कच्चे मकान और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा.
हाथियों का आवागमन

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इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रिपोर्ट के अनुसार हाथी भोजन और पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं. एक हाथी को प्रतिदिन लगभग 200 किलो चारा की जरूरत होती है. जब जंगलों में प्राकृतिक चारा कम पड़ता है, तो हाथी खेतों की ओर रुख करते हैं. गेहूं, गन्ना और मक्का जैसी फसलें जंगली वनस्पति की तुलना में अधिक पोषण और कैलोरी देती हैं, यही कारण है कि झुंड जोखिम उठाकर खेतों में घुस जाता है.
इसके अलावा वन क्षेत्रों के बीच पारंपरिक गलियारों में बाधा या विखंडन होने से हाथी रास्ता बदलने के लिए मजबूर हो जाते हैं. सड़के, रेल लाइनें और मानव बस्तियों का विस्तार इनके प्राकृतिक आवास की निरंतरता तोड़ रहा है.
क्या है हाथियों का गलियारा?

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हाथी गलियारा भूमि की संकरी पट्टी या रास्ता है, जो दो बड़े जंगली आवासों को जोड़ता है. हाथी भोजन, पानी और प्रजनन के लिए लंबी दूरी तय करते हैं. यह उनके लिए हाईवे की तरह काम करता है. केंद्र की परियोजना हाथी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 15 राज्यों में लगभग 150 हाथी गलियारे चिह्नित किए गए हैं. जमुई-झाझा और चकाई वन प्रक्षेत्र का इलाका बिहार का पहला हाथी गलियारा है.
इसके अलावा झारखंड के रांची, खूंटी, गिरिडीह, दुमका, चाईबासा, हजारीबाग और पलामू क्षेत्र भी हाथी गलियारों के लिए प्रसिद्ध है. पश्चिम बंगाल में 26, पूर्वी-मध्य भारत में 52 और उत्तर-पूर्व भारत में 48 गलियारे हैं. तमिलनाडु के मुदुमलाई नेशनल पार्क और जिम कार्बेट नेशनल पार्क भी इस सूची में शामिल हैं.
फसलों और संपत्ति को पहुंचा रहे नुकसान

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हाथियों के झुंड ने जिले में कई बार उत्पात मचाया है. 21 से 24 नवंबर, 2025 को चकाई प्रखंड के बरमोरिया, पोझा, बामदह और बोंगी पंचायत के 20 से अधिक गांवों में तथा सोनो प्रखंड के बटिया और कटहराटांड़ में फसलें और कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए. इस दौरान आधा दर्जन लोग घायल भी हुए और एक बच्चे का हाथ टूट गया.
हाथियों का नया मार्ग

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जमुई-झाझा-चकाई वन क्षेत्र हुआ गलियारा घोषित
वनों से जोड़ने वाला बिहार का पहला हाथी गलियारा
सात माह में पांचवीं बार हाथियों ने जमुई में मचाया उत्पात
अब बन गया प्राकृतिक गलियारा

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28 फरवरी, 2026 को खैरा प्रखंड के ताराटांड गांव में आधा दर्जन से अधिक कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए और 100 बीघा से अधिक फसल को नुकसान पहुंचा. 15-16 मार्च को जमुई प्रखंड के अड़सार, इकेरिया, खड़सारी, मंझवे और नवीनगर में 26 हाथियों के झुंड ने लगभग 500 बीघा फसल रौंद दी. इसके अलावा 15 मई से चकाई और गिरिडीह जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में हाथियों का एक जोड़ा भी मौजूद है, जिसने आधा दर्जन किसानों की मूंग की फसल को नुकसान पहुंचाया.