
1 / 5
भारत में एक नया हाइड्रोजन कुकिंग स्टोव रसोई के कामकाज के तरीके को पूरी तरह से बदल रहा है, क्योंकि इसमें LPG सिलेंडरों की कोई जरूरत नहीं. यह हाइड्रोजन स्टोव गैस के बजाय पानी से चलता है और पारंपरिक सिलेंडरों की जगह ले सकता है. यह प्लग एंड यूज सिस्टम के तहत ग्रीन हाइड्रोजन से चलता है और इसे घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है.
हाइड्रोजन स्टोव में क्या-क्या खास?

2 / 5
यह कोई साधारण गैस स्टोव नहीं है जिसमें थोड़ा-बहुत बदलाव किया गया हो. इसमें 100% ग्रीन हाईड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में होता है. इसमें 2 बर्नर हैं. यह स्टेनलेस स्टील बॉडी से निर्मित है जो आकार में एक मानक स्टोव के समान है, लेकिन इसके संचालन का तरीका बहुत अलग है. लगभग 1,50,000 रुपये प्रति पीस की कीमत वाला यह चूल्हा फिलहाल आम घरों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं बनाया गया है.
यह कैसे काम करता है?

3 / 5
इस स्टोव में यूज किया जाने वाला हाइड्रोजन बर्नर नियंत्रित, धीमी आंच पर या लगभग बिना आग के खाना पकाने की सुविधा देता है. खाना पकाने के लिए आग समान रूप से वितरित होती है. LPG, स्टोव के विपरीत, यह गैस सिलेंडरों पर निर्भर नहीं करता है. यह एक नियंत्रित हाइड्रोजन प्रवाह प्रणाली के साथ काम करता है.
कहां-कहां हो सकता है प्रयोग?

4 / 5
हाइड्रोजन सिर्फ घरों के लिए ही नहीं, बल्कि और भी कई उद्देश्यों के लिए बनाया गया है. हालांकि इसका इस्तेमाल घरेलू रसोई में किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान में इसका दायरा व्यापक है. इसे गवर्नमेंट क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, रिसर्च एंड टैस्टिंग लैब्स, कम्यूनिटी किचन एंड कंटीन, डिफेंस एंड रिमोट लोकेशंस और इंस्टीटयूशनल एंड इंडस्ट्रियल किचन में भी प्रयोग करने का प्लान है.
तुरंत नहीं ले पाएगा LPG की जगह

5 / 5
यह हाइड्रोजन कुकिंग स्टोव दिखाता है कि रसोई की तकनीक सिलेंडरों से दूर होकर वैकल्पिक ईंधनों की ओर किस दिशा में आगे बढ़ सकती है. यह घरों में एलपीजी की जगह तुरंत नहीं ले पाएगा, लेकिन खाना पकाने के नए तरीकों की ओर यह एक स्पष्ट कदम है.