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भारतीय सेना में अनुशासन और पद का बहुत महत्व होता है जिसे उनकी वर्दी पर लगे बैज से पहचाना जा सकता है. एक सैनिक से लेकर जनरल तक की पहचान उनके कंधों पर सजे खास प्रतीकों से होती है.
लेफ्टिनेंट और कैप्टन?

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सेना में कमीशन अधिकारी के तौर पर करियर की शुरुआत लेफ्टिनेंट के पद से होती है जिनके कंधे पर दो सितारे लगे होते हैं. दो साल की सर्विस के बाद अफसर कैप्टन बनते हैं जिनकी वर्दी पर तीन सितारे चमकते दिखाई देते हैं.
मेजर और लेफ्टिनेंट कर्नल?

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छह साल की सर्विस पूरी करने के बाद अधिकारी मेजर बनते हैं जिनके कंधे पर सिर्फ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक यानी अशोक स्तंभ होता है. वहीं लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर अशोक स्तंभ के साथ एक सितारा भी लगा होता है.
कर्नल और ब्रिगेडियर?

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कर्नल के पद पर पहुंचने वाले अधिकारियों की वर्दी पर दो सितारों के साथ अशोक स्तंभ का चिन्ह बना होता है. ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारियों के कंधे पर तीन सितारे त्रिकोणीय आकार में सजे होते हैं जिनके साथ अशोक स्तंभ होता है.
मेजर जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल?

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मेजर जनरल की वर्दी पर एक सितारे के साथ क्रॉस बैटन और तलवार का निशान बना होता है जो उनकी वरिष्ठता दर्शाता है. लेफ्टिनेंट जनरल के बैज पर अशोक स्तंभ के नीचे क्रॉस बैटन और तलवार के निशान बने होते हैं.
जनरल और फील्ड मार्शल?

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सेना प्रमुख यानी जनरल के कंधे पर अशोक स्तंभ के साथ एक सितारा और क्रॉस बैटन व तलवार का चिन्ह होता है. फील्ड मार्शल के बैज पर कमल के घेरे में क्रॉस बैटन और तलवार के ऊपर अशोक स्तंभ होता है.