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प्रधानमंत्री की कार चलाने वाला कोई साधारण ड्राइवर नहीं बल्कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी का एक ट्रेंड अधिकारी होता है. ये जवान अक्सर आईपीएस, सीआरपीएफ या बीएसएफ जैसे बड़े सुरक्षा बलों से प्रतिनियुक्ति पर चुनकर यहां लाए जाते हैं.
कैसे होता है इनका चुनाव?

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इस पद के लिए कोई सीधी भर्ती नहीं निकलती बल्कि पुलिस और सेना के सबसे काबिल जवानों को कड़ी प्रक्रिया के बाद चुना जाता है. उम्मीदवार को पहले किसी सुरक्षा बल में शामिल होकर अपनी काबिलियत साबित करनी पड़ती है जिसके बाद ही उसका नाम आगे जाता है.
कैसी होती है ड्राइविंग ट्रेनिंग?

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चयन के बाद इन जवानों को एंटी-स्किड ड्राइविंग और तेज रफ्तार में दुश्मन को छकाने वाली एस्केप मैन्यूवर जैसी खतरनाक ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ियों को हर तरह के मौसम और मुश्किल हालातों में बिना रुके चलाने की खास महारत हासिल होती है.
क्या है खुफिया जांच का रोल?

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प्रधानमंत्री का ड्राइवर बनने से पहले उम्मीदवार और उसके पूरे खानदान की खुफिया एजेंसियां बड़ी गहराई से गोपनीय जांच करती हैं. जब तक इंटेलिजेंस ब्यूरो और अन्य एजेंसियां पूरी तरह हरी झंडी नहीं दे देतीं तब तक किसी को स्टयरिंग नहीं मिलता.
कितनी बड़ी है इनकी जिम्मेदारी?

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इन अधिकारियों को केवल गाड़ी चलाना ही नहीं बल्कि रास्ते की सुरक्षा और इमरजेंसी रिपेयरिंग का भी पूरा ज्ञान होना जरूरी होता है. एसपीजी के ये सुरक्षा एक्सपर्ट प्रधानमंत्री के साये की तरह काम करते हैं ताकि पलक झपकते ही किसी भी खतरे को टाला जा सके.
क्या है नौकरी की सबसे बड़ी शर्त?

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प्रधानमंत्री के काफिले में शामिल होने के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ-साथ मानसिक मजबूती और रूट प्लानिंग की गहरी समझ होना अनिवार्य है. हर वक्त अलर्ट रहने वाले ये जांबाज अपनी जान जोखिम में डालकर देश के सबसे बड़े पद की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं.