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वैसे तो सब जानते हैं कि धरती के नीचे बहुत पानी है लेकिन ये पानी वैसे नहीं होता है जैसे आपको किसी नदी या फिर समंदर में दिखाई देता है. ये पानी धरती के नीचे अलग-अलग परतों में मौजूद होता है, जिसे भूजल कहा जाता है. ये पानी जमीन के नीचे मिट्टी, रेत और चट्टानों के बीच में जमा रहता है. सामान्यत: 10 से लेकर 100 मीटर की गहराई तक पानी आसानी से मिल जाता है लेकिन कुछ जगहों पर ये हजारों मीटर नीचे भी पाया जाता है.
पृथ्वी की ऊपरी सतह के नीचे एक्वीफर

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वैज्ञानिकों की मानें तो पृथ्वी की ऊपरी सतह के नीचे एक्कीफर (Aquifer) नाम की परतें होती हैं और यहां पर पानी स्टोर होता है. यहीं से हम बोरवेल और हैंडपंप के जरिए पानी निकाल पाते हैं. भारत में लाखों लोग इसी भूजल पर निर्भर रहते हैं.
पृथ्वी की सतह पर है बहुत पानी

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हैरानी की बात यह है कि पृथ्वी की सतह पर इससे कहीं ज्यादा पानी हो सकता है. शोध बतातें हैं कि पृथ्वी के मैंटल (Mantle) यानी सतह से करीब 400 से लेक 700 किलोमीटर नीचे तक भी पानी मौजूद हो सकता है. ये पानी तरल के रूप में नहीं बल्कि खनिजों के अंदर फंसा हुआ होता है.
किस जमीन पर कितनी नीचे होता है पानी?

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किस जमीन पर कितना पानी मिलेगा, ये जमीन की बनावट पर निर्भर करता है. धरती में पानी की गहराई पर जगह पर एक जैसी नहीं होती. नदियों के पास ये सतह से लेकर 0 फीट पर भी हो सकता है. पहाड़ों या फिर किसी सूखे इलाके पर देखें तो ये पानी 1200 फीट से भी नीचे जा सकता है. वहीं, नदियों और झरनों के आस-पास से पानी सतह से बस कुछ ही इंच नीचे मिल जाता है.
कितनी गहराई तक हुई है धरती की खुदाई?

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नदियों और झरनों के पास बारिश का पानी रिसकर जमीन में ही जमा हो जाता है. ऐसे में इन इलाकों में कुएं खोदने में भी मेहनत नहीं लगती और आसानी से भूजल मिल जाता है. हालांकि धरती के कोर में भी काफी पानी मौजूद है. ये कुल पानी का 1.6 प्रतिशत है. वैज्ञानिकों का मानना है कि जब धरती बनी थी, तब से ये पानी वहां है. इतनी गहराई पर इंसान का पहुंचना भी फिलहाल संभव नहीं है. अभी तक धरती की सबसे गहरी खुदाई 12 किमोमीटर तक ही हो पाई है.
क्या धरती के अंदर छिपा है महासागर?

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साल 2014 में वैज्ञानिकों ने एक खास रिंगवुडाइट (Ringwoodite) की खोज की थी और इसमें पानी के अंश मिले थे. ये खोज संकेत देती है कि पानी के अंदर एक छिपा हुआ महासागर भी हो सकता है. ये सतह के सभी महासागरों के बराबर या फिर उससे कहीं ज्यादा पानी को समेटे हुए हैं.