अभी पृथ्वी की कक्षा में दो स्पेस स्टेशन मौजूद हैं, जो पूरी तरह से काम कर रहे हैं. ये स्टेशन एडवांस्ड प्रयोगशालाओं के रूप में काम करते हैं जहां पर अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक प्रयोग, तकनीकी परीक्षण और लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष मिशन होते हैं. जहां इनमें से एक स्टेशन कई देश की अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी से चलाया जाता है वहीं दूसरा पूरी तरह से चीन के कंट्रोल में है.
अंतर्राष्ट्रीय स्पेश स्टेशन

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अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे पुराना सक्रिय स्पेस स्टेशन है. नवंबर 2000 से ही इसमें लगातार अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित है और हर दिन कई बार पृथ्वी का चक्कर लगाता है.
चीन के पास है खुद का स्पेस स्टेशन

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अभी पृथ्वी की कक्षा में मौजूद दूसरा सक्रिय स्पेश स्टेशन Tiangong स्पेस स्टेशन है. इस स्टेशन का पूरा मालिकाना हक और संचालन चीन के पास हैं. यह स्पेस स्टेशन 2022 में पूरी तरह से काम करने लगा था.
क्या है NASA की भविष्य की योजना?

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मिली जानकारी के अनुसार, ऐसा कहा जा रहा है कि नासा 2030 के आस-पास अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को बंद कर देगा. इसके बाद भविष्य के स्पेस स्टेशन और व्यावसायिक अंतरिक्ष यात्रा में निजी कंपनियों की बड़ी भूमिका होने की उम्मीद है. कई अमेरिकी निजी कंपनियां पहले से ही कमर्शियल स्पेस स्टेशन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं.
भारत भी कर रहा स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की कोशिश

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अभी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन कोई स्पेस स्टेशन नहीं चलाता है. हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपना खुद का एक स्टेशन बनाने की योजना पर काम कर रहा है. इसका नाम भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन होगा. भारत का लक्ष्य है कि वह गगनयान कार्यक्रम के तहत मुख्य मिशन को पूरा करने के बाद 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन लॉन्च कर दे.
अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर कई देशों का है मालिकाना हक

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जानकारी के लिए आपको बता दें कि पृथ्वी की कक्षा में मौजूद अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन किसी एक देश का नहीं है. यह 15 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली पांच प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों की साझेदारी से चलता है. इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका की NASA, रूस की Roscosmos, जापान की JAXA और कनाडा की Canadian Space Agency के साथ-साथ कई यूरोपीय देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूरोपीय स्पेस एजेंसी शामिल हैं.