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करीब आधी दुनिया जीत लेने वाला चंगेज़ खान, इतिहास का सबसे क्रूर शासक माना जाता था. अपने मंगोल साम्राज्य को बढ़ाने के लिए चंगेज़ खान ने अपनी पूरी जिदंगी में जितने कत्ल किए या करवाए, शायद ही उतना बड़ा नरसंहार इतिहास में किसी शासक द्वारा किया गया होगा.
चंगेज़ खान का धर्म

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चंगेज़ खान के धर्म को लेकर अक्सर विवाद और तर्क-वितर्क होता रहा है. नाम में खान होने की वजह से कई लोग उसे मुसलमान समझ लेते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि चंगेज़ खान के सिर्फ नाम में ही खान है, उसका दूर-दूर तक इस्लाम धर्म से कोई नाता नहीं था. 1219 से 1223 तक चंगेज़ खान ने लाखों मुसलमानों का नरसंहार किया.
चंगेज़ खान का धर्म

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इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार चंगेज़ खान का मूल नाम तेमुजिन था और वो मंगोल शमनवाद का अनुयायी था. चंगेज़ खान किसी मूर्ति या मजार की पूजा नहीं करता था, बल्कि वो 'तेन्ग्री' या अनंत नीले आकाश की पूजा करता था, जो प्रकृति, आत्माओं और सर्वोच्च आकाश देवता को समर्पित है. उसके नाम में 'खान' तुर्किक-मंगोल परंपरा से आई, जो इस्लाम से पहले की है, हालांकि बाद में मध्य एशिया में मुस्लिम शासकों ने इसे अपनाया.
वंशजों ने कबूल किया इस्लाम

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ऐसा भी माना जाता है कि उसके वंशजों ने बाद में इस्लाम कबूल किया, लेकिन चंगेज़ स्वयं कभी मुसलमान नहीं बने. 1218 में मंगोल व्यापारियों का कारवां ओट्रार पहुंचा, लेकिन स्थानीय गवर्नर इनालचुक ने उन्हें जासूसी के आरोप में कैद कर हत्या कर दी और उनका माल लूट लिया.
ख्वारिज्म साम्राज्य के विनाश की शुरुआत

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चंगेज़ ने सुल्तान मुहम्मद को इनालचुक की सजा और मुआवजे की मांग भेजी, पर सुल्तान ने एक दूत का सिर काट दिया और बाकियों का अपमान किया. इस अपमान ने ख्वारिज्म साम्राज्य के विनाश का द्वार खोल दिया. 1219 में चंगेज़ ने 90,000 से 200,000 सैनिकों के साथ आक्रमण शुरू किया, पहले ओट्रार पर कब्जा किया जहां गवर्नर इनालचुक को पिघले चांदी से मार डाला गया.
खुद को बताया 'ईश्वर का कोड़ा'

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चंगेज़ ने बुखारा और समरकंद जैसे शहरों को घेराबंदी में झुकाया गया, जहां लाखों नागरिक मारे गए और शहर जला दिए गए. इस अभियान ने पूरे मध्य एशिया को तबाह कर दिया, जिसमें अनुमानित 20 से 40 लाख मौतें हुईं. बुखारा पहुंचते ही चंगेज़ ने मस्जिद में खड़े होकर खुद को 'ईश्वर का कोड़ा' घोषित किया और शहर को लूटा-जला दिया.
मुसलमानों को दिया भयानक आघात

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करीब 20,000 सैनिकों सहित हजारों निवासियों का नरसंहार हुआ, कारीगरों को छोड़कर बाकी को गुलाम बनाया गया. शहर की अधिकांश इमारतें राख हो गईं, जो इस्लामी दुनिया के लिए भयानक आघात था.
दामाद की मौत का लिया बदला

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निशापुर में चंगेज़ के दामाद की मौत के बाद बदला लेते हुए तोलुई ने शहर को रौंद डाला, जहां कुत्तों-बिल्लियों तक को नहीं बख्शा गया. लाखों लोगों का कत्लेआम हुआ, शवों के ढेर लगा दिए गए. यह नरसंहार मंगोल क्रूरता का प्रतीक बन गया.