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दुनिया भर में सभी देश अपनी देश की अर्थव्यवस्थाएं मजबूर और स्थिर बनाए रखने के लिए अमेरिकी डॉलर को लॉकर में संभाल कर रखते हैं. जब भी किसी देश पर आर्थिक संकट आता है या फिर देश की मुद्रा कमजोर होती है, तो फॉरेक्स रिजर्व यानी विदेशी मुद्रा भंडार ही उसे सहारा देता है.
भारतीय रुपये की स्थिति

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भारत में भी डॉलर की तुलना में गिरते रुपए को बचाने के लिए सरकार सोना कम खरीदने और विदेशी यात्राओं पर नियंत्रण जैसी अपील कर रही है. ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस डॉलर को पूरी दुनिया सबसे सुरक्षित मानकर जमा करती है, उस डॉलर को छापने वाला देश यानी अमेरिका खुद अपने खजाने में क्या रखता है? अमेरिका की बचत की रणनीति दुनिया के अन्य देशों से बिल्कुल अलग और दिलचस्प है.
अमेरिका कौन सा खजाना जमा करता है?

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आमतौर पर कोई भी देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देता है, लेकिन अमेरिका के साथ मामला उलट है. चूंकि डॉलर खुद दुनिया की सबसे प्रमुख वैश्विक आरक्षित मुद्रा है, इसलिए अमेरिका अपने भंडार में डॉलर नहीं रखता है. वह अपनी तिजोरी में उन विदेशी मुद्राओं को जगह देता है जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत और स्थिर मानी जाती हैं. अमेरिका के विदेशी मुद्रा भंडार के मुख्य घटकों में 'यूरो' और 'जापानी येन' सबसे ऊपर हैं.
येन और यूरो पर अमेरिका करता है भरोसा

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अमेरिकी खजाना अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मुख्य रूप से दो बड़ी मुद्राओं यूरो और जापानी येन के रूप में सुरक्षित रखता है. इन मुद्राओं को वह नकद के बजाय संपत्तियों, सरकारी बॉन्ड और विदेशी बैंक जमा के रूप में रखता है. ये ऐसी मुद्राएं हैं जिनकी वैश्विक साख बहुत ऊंची है. अमेरिका का मानना है कि इन दो मुद्राओं में निवेश करने से उसके पोर्टफोलियो में विविधता बनी रहती है और वैश्विक बाजार में संतुलन बना रहता है.
दूसरे देशों की प्रतिभूतियों में निवेश

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वहीं, देश की अर्थव्यस्था के लिए सिर्फ विदेश नोट जमा करना ही काफी नहीं होता है इसलिए अमेरिीक सरकार अन्य देशों की सरकार द्वारा समर्थित बॉन्ड और ट्रेजरी बिलों में भी बड़ी निवेश करती है. इसे सरकारी प्रतिभूतियां कहते हैं. ये प्रतिभूतियां सुरक्षित मानी जाती हैं और समय के साथ अमेरिका को ब्याज के रूप में कमाई भी कराती है. वहीं, इसके अलावा अमेरिका की विदेशी मुद्रा जमा राशि अक्सर अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक या अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों में रखी जाती है, जिससे वैश्विक बैंकिंग प्रणाली में उसकी पकड़ मजबूत रहती है.
फेडरल रिजर्व और खजाने की कमान

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अमेरिका का यह विशाल विदेशी भंडार मुख्य रूप से दो जगहों पर रखा और प्रबंधित किया जाता है. पहला है फेडरल रिजर्व का 'सिस्टम ओपन मार्केट अकाउंट' (SOMA) और दूसरा है 'एक्सचेंज स्टैबिलाइजेशन फंड' (ESF). ये दोनों विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि अमेरिकी डॉलर की साख बनी रहे और विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में स्थिरता बनी रहे. मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के पास लगभग 38.1 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद था.
आईएमएफ और विशेष आहरण अधिकार

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अमेरिका के खजाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से जुड़ा होता है. इसमें विशेष आहरण अधिकार यानी SDR और IMF में आरक्षित स्थिति शामिल होती है. SDR एक तरह की अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति है, जिसे IMF ने बनाया है. यह अमेरिका को जरूरत पड़ने पर अन्य सदस्य देशों से विदेशी मुद्रा प्राप्त करने की सुविधा देता है. यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है.