क्या हर धर्म के लोग खाते हैं मछली? जानिए देश के वो राज्य, जहां नॉनवेज के आड़े नहीं आता रिलीजन

भारत में नॉनवेज (मांसाहार) और वेजीटेरियन (शाकाहारी) भोजन खाने वालों के बीच हमेशा से विवाद देखने को मिलता रहा है. पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अब मछली खाने को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. विधानसभा चुनाव के दौरान अनुराग ठाकुर को मछली-चावल खाते देखा गया, अब इसे लेकर अनुराग पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लग रहा है.

Fish consumption
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भारत में नॉनवेज (मांसाहार) और वेजीटेरियन (शाकाहारी) भोजन खाने वालों के बीच हमेशा से विवाद देखने को मिलता रहा है. पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अब मछली खाने को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. विधानसभा चुनाव के दौरान अनुराग ठाकुर को मछली-चावल खाते देखा गया, अब इसे लेकर अनुराग पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लग रहा है.  

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भारत में मछली कितने लोग खाते हैं?

भारत में मछली कितने लोग खाते हैं?2 / 9

अनुराग ठाकुर के मछली-चावल खाने के बाद अब ये सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या किसी भी धर्म के लोग नॉनवेज खा सकते हैं या देश में ऐसे कौन-कौन से राज्य जहां नॉनवेज के आड़े धर्म या रिलीजन नहीं आता. आपको बता दें कि एक स्टडी के अनुसार देश में 72 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में मछली का सेवन करती है.

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बढ़ गई मछली खाने वालों की संख्या

बढ़ गई मछली खाने वालों की संख्या3 / 9

हालिया अध्ययनों से पता चलता है कि 2005-06 से 2019-21 तक मछली खाने वालों की संख्या 73 करोड़ से बढ़कर 96.6 करोड़ हो गई है. प्रति व्यक्ति मछली खपत भी 4.9 किलोग्राम से 8.89 किलोग्राम तक पहुंच गई, जो आहार में बदलाव को दर्शाता है.

त्रिपुरा में सबसे ज्यादा मछली प्रेम

त्रिपुरा में सबसे ज्यादा मछली प्रेम4 / 9

त्रिपुरा देश का ऐसा राज्य है जहां 99.35 प्रतिशत आबादी मछली का सेवन करती है, जो स्थानीय जल स्रोतों और सांस्कृतिक परंपराओं का परिणाम है. यहां हिंदू, ईसाई और अन्य समुदाय बिना किसी धार्मिक रोक के इसे प्रमुख भोजन बनाते हैं.

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केरल और गोवा का मुख्य भोजन

केरल और गोवा का मुख्य भोजन5 / 9

केरल में 53.5 प्रतिशत लोग रोजाना मछली खाते हैं, जबकि गोवा में यह आंकड़ा 36.2 प्रतिशत है, जो समुद्री संपदा से समृद्ध इन राज्यों की विशेषता है. सभी धर्मों के निवासी यहां मछली को प्रोटीन स्रोत के रूप में अपनाते हैं.

यहां संस्कृति का हिस्सा है मछली

यहां संस्कृति का हिस्सा है मछली6 / 9

असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में मछली नदियों और तालाबों से आसानी से उपलब्ध होने से सभी समुदायों का आम भोजन है. स्थानीय परंपराओं में यह धार्मिक बंधनों से परे एक आवश्यक आहार है.

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ओडिशा-पश्चिम बंगाल

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पश्चिम बंगाल में 21.9 प्रतिशत लोग रोज मछली खाते हैं, जबकि ओडिशा में भी यह प्रचलित है, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय इसे बिना हिचक अपनाते हैं. बंगाली थाली में मछली का स्थान अटल है.

दक्षिणी राज्य कितना खाते हैं मछली?

दक्षिणी राज्य कितना खाते हैं मछली?8 / 9

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में मछली का भारी उपभोग होता है, जो तटीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा है और सभी धार्मिक समूहों द्वारा स्वीकृत है. यहां मांसाहार परंपरा मजबूत होने से कोई विवाद नहीं उठता.

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उत्तर भारत में कम लेकिन मौजूद आदत

उत्तर भारत में कम लेकिन मौजूद आदत9 / 9

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में मछली उपभोग न्यूनतम (हरियाणा में मात्र 20.55 प्रतिशत) है, फिर भी कुछ समुदाय शहरों में मछली खाने को लेकर किसी धर्म को नहीं मानते.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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