Delhi Metro Daily Expense : दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग समय पर ऑफिस पहुंचने के लिए मेट्रो पर निर्भर हैं. दिल्ली मेट्रो रोजाना करोड़ों रुपये बिजली और संचालन पर खर्च करती है, लेकिन टिकट, विज्ञापन से अच्छी कमाई भी होती है. साथ ही मेट्रो की साफ-सफाई ने इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद मेट्रो सिस्टम में शामिल कर दिया है. समय पर चलने की दर करीब 99.9 प्रतिशत तक है. सवाल है कि बड़ी लागत के बाद दिल्ली मेट्रो की कमाई कितनी है?
सरकार और DMRC को संभालना पड़ता है सिस्टम

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DMRC की कमाई का सबसे बड़ा जरिया टिकट है. रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं, जिससे करोड़ों रुपये की आमदनी होती है. इसके अलावा मेट्रो स्टेशन पर लगे विज्ञापन, दुकानों का किराया और स्मार्ट कार्ड जैसी सुविधाओं से भी DMRC को अच्छा कमाई मिलता है. हालांकि मेट्रो चलाने का खर्च भी बहुत बड़ा है, इसलिए सरकार और DMRC दोनों को मिलकर इस सिस्टम को संभालना पड़ता है.
साल 2025 में DMRC ने एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया

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दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने साल 2025 में एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया है, जिससे सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दिल्ली मेट्रो में कुल 235.8 करोड़ यात्रियों ने सफर किया. यह संख्या 2024 के 223.5 करोड़ यात्रियों से काफी ज्यादा है. इसका मतलब है कि दिल्ली मेट्रो अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मेट्रो प्रणालियों में से एक बन गई है.
गर्मी, जाम और पेट्रोल-डीजल की महंगी कीमतें

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साथ ही बढ़ती गर्मी, ट्रैफिक जाम और पेट्रोल-डीजल की महंगी कीमतों ने भी लोगों को मेट्रो की तरफ ज्यादा खींचा है. अब दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग अपनी कार और बाइक छोड़कर मेट्रो से सफर करना पसंद कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली मेट्रो हर दिन करीब 30 लाख यूनिट बिजली की खपत करती है. जो दिल्ली की कुल बिजली खपत का लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सा है.
महीने का खर्च करीब 55 करोड़ से भी ज्यादा

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इसके अलावा अगर इस बिजली खर्च को पैसों में समझें तो आंकड़ा और भी चौंकाने वाला हो जाता है, दिल्ली मेट्रो हर दिन करीब 1.83 करोड़ रुपये की बिजली खर्च करती है. यानी महीने का खर्च करीब 55 करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैठता है. यह बिजली मेट्रो ट्रेनों को चलाने, स्टेशनों की लाइट, लिफ्ट, एस्केलेटर और वेंटिलेशन सिस्टम के लिए इस्तेमाल होती है.
140 मेगावाट सोलर प्लांट का भी इस्तेमाल

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दिल्ली मेट्रो की खास बात सिर्फ इसकी कमाई या खर्च नहीं है, बल्कि इसका भरोसा है. बता दें कि डीएमआरसी को अपनी जरूरत की लगभग आधी बिजली दिल्ली, यूपी और हरियाणा की बिजली कंपनियों से मिलती है. वहीं बाकी बिजली सोलर एनर्जी से तैयार की जाती है. इसके लिए डीएमआरसी 99 मेगावाट के ऑफ-साइट सोलर प्लांट और 140 मेगावाट के रूफटॉप सोलर प्लांट का भी इस्तेमाल करती है.