दुनिया पर युद्ध से भी बड़ा संकट! सूखा-बाढ़ और हीटवेव से जूझेंगे लोग, आ रहा है सदी का सबसे खतरनाक 'सुपर एल नीनो'

इन दिनों देश में मौसम जरा बदला हुआ है. कभी तेज बारिश तो कभी धूप ने लोगों को भी कन्फ्यूज कर दिया है कि अप्रैल के महीनें में इतनी बारिश कैसे हो सकती है? वहीं, दूसरी ओर मिली जानकारी के अनुसार, प्रशांत महासागर में एल नीनो बन रहा है जो इस साल दुनिया के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह एल नीनो बेहद ताकतवर हो सकता है जो मौसम के पैटर्न को बदलकर कई देशों में सूखा, बाढ़ और गर्मी भी बढ़ा सकता है.

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प्रशांत महासागर में बढ़ रही गर्मी

प्रशांत महासागर में बढ़ रही गर्मी2 / 6

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस समय प्रशांत महासागर में तेजी से गर्मी बढ़ रही है, जिससे एल नीनो बनने के संकेत मिल रहे हैं. यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र के ताजा अनुमान के अनुसार, इस साल सुपर एल नीनो बनने की संभावना काफी ज्यादा है और अगर ऐसा होता है तो यह सिर्फ एक सामान्य जलवायु बदलाव नहीं होगा बल्कि इसका असर कई सालों तक रह सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका प्रभाव 2027 तक वैश्विक तापमान को और ज्यादा बढ़ा देगा. यह तब बनता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. यह बदलाव छोटा लगता है लेकिन इससे हवा की दिशा, बारिश और मौसम के पूरे सिस्टम पर असर डालता है.

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कब और कैसे बनता है 'सुपर एल नीनो'

कब और कैसे बनता है 'सुपर एल नीनो'3 / 6

वैज्ञानिकों के अनुसार, जब समुद्र का तापमान सामान्य से करीब2 डिग्री सेल्सियस या फिर उससे ज्यादा बढ़ता है तब इसे 'सुपर एल नीनो' कहा जाता है. ऐसे मजबूत एल नीनो हर 10 से 15 साल में एक बार आते हैं, लेकिन जब आते हैं तो उनका असर ज्यादा बड़ा और लंबे समय तक होता है. अभी के मॉडल्स बता रहें हैं कि तापमान 1997-98 और 2015-16 जैसे बड़े एल नीनो के स्तर तक पहुंच सकता है. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पिछले 100 सालों में से सबसे ताकतवर एल नीनो में से एक हो सकता है. हालांकि, हर एल नीनो एक जैसा नहीं होता है और इसके असर अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकते हैं.

दुनिया और भारत पर एल नीनो का असर

दुनिया और भारत पर एल नीनो का असर4 / 6

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात मानसून को लेकर है. मजबूत एल नीनो के दौरान अक्सर बारिश कमजोर या असमान होती है, खासकर उत्तर और मध्य भारत में. इससे खेती, पानी की उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. दक्षिण-पूर्व एशिया और कैरेबियन के कुछ हिस्सों में सूखा और ज्यादा गर्मी पड़ सकती है. वहीं, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट जैसे पेरू और इक्वाडोर में भी भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, प्रशांत महासागर में चक्रवात और तूफान भी बढ़ सकते हैं जबकि अटलांटिक महासागर में तूफानों की संख्या कम हो सकती है.

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रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का है खतरा

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का है खतरा5 / 6

इस संभावित सुपर एल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में तेज बढ़ोतरी हो सकती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि 2026 या 2027 दुनिया के अब तक के सबसे गर्म साल बन सकते हैं. यह तापमान बढ़ोतरी पेरिस समझौता के 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को भी एक साल के लिए पार कर सकती है, जो जलवायु परिवर्तन के हिसाब से बेहद गंभीर संकेत माना जाता है.

भारत पर क्या होगा इसका असर?

भारत पर क्या होगा इसका असर?6 / 6

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानसून को लेकर है. आमतौर पर एल नीनो के सालों में मानसून कमजोर रहता है या बारिश समान रूप से ज्यादा होती है. 2026 में भी बारिश कम होने की आशंका जताई जा रही है, खासकर मध्य और उत्तरी भारत में. इससे खेती, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. अगर बारिश कम हुई तो फसल उत्पादन घट सकता है और पानी की कमी जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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