कनाडा के होंगे टुकड़े! दुनिया को मिल सकता है नया देश अल्बर्टा, कौन हैं अलग मुल्क की मांग करने वाले मिच सिल्वेस्ट्रे?

कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा को अलग देश बनाने की मांग अब और ज्यादा तेज हो गई है. अलगाववादियों ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने इतना समर्थन जुटा लिया है कि अब स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराया जा सकता है.

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अलगाववादी नेताओं ने जुटाया समर्थन

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कनाडा का पश्चिमी प्रांत Alberta एक बार फिर अलगाव की मांग को लेकर चर्चा में है. Stay Free Alberta संगठन द्वारा शुरू की गई जनमत संग्रह की पहल ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना दिया है. संगठन का दावा है कि उसने लाखों हस्ताक्षर जुटाकर यह दिखा दिया है कि प्रांत में एक बड़ा वर्ग कनाडा से अलग होने के विचार का समर्थन करता है. अलगाववादी नेताओं के मुताबिक, उन्होंने करीब 3 लाख हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंपे हैं, जबकि इसके लिए 1.78 लाख दस्तखत की जरूरत थी. आंदोलन के नेता मिच सिलवेस्ट्रे ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि अब यह लड़ाई अगले चरण में पहुंच गई है. (फोटो- अल जजीरा)

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कौन हैं मिच सिलवेस्ट्रे?

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मिच सिल्वेस्ट्रे अल्बर्टा के एक जाने-माने व्यवसायी, राजनीतिक कार्यकर्ता और 'स्टे फ्री अल्बर्टा' आंदोलन (जो 'अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट' से भी जुड़ा है) के नेता हैं. उन्हें उस याचिका का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है, जिसने इतने हस्ताक्षर जुटा लिए कि 2026 में एक स्वतंत्रता जनमत संग्रह (referendum) कराया जा सके; इस जनमत संग्रह में यह तय किया जाएगा कि क्या अल्बर्टा को कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र बन जाना चाहिए. (फोटो- अल जजीरा)

सर्वे में 30% लोग ही अलग देश के पक्ष में

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अगर यह प्रस्ताव वोटिंग तक पहुंचता है, तो लोगों से सीधा सवाल पूछा जाएगा कि क्या अल्बर्टा कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए. लेकिन सर्वे बताते हैं कि अभी सिर्फ करीब 30 प्रतिशत लोग ही इसके समर्थन में हैं, यानी जनमत संग्रह पास होना भी आसान नहीं है. हालांकि अलगाववादियों का मानना है कि यह आंकड़ा वोटिंग के दौरान बढ़ने वाला है. अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि अगर जरूरी हस्ताक्षर पूरे होते हैं तो वह वोटिंग आगे बढ़ाएंगी, लेकिन वह खुद कनाडा से अलग होने के पक्ष में नहीं हैं. (फोटो- सोशल मीडिया)

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अलगाववादी आंदोलन की जड़ें पुरानी

अलगाववादी आंदोलन की जड़ें पुरानी5 / 9

इस अलगाववादी आंदोलन की जड़ें काफी पुरानी हैं. अल्बर्टा, जहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं, लंबे समय से खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानता है. यहां के लोग मानते हैं कि उनकी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राजनीति अलग है, लेकिन फैसले ओटावा में बैठकर लिए जाते हैं.  (फोटो- सोशल मीडिया)

कनाडा से अलग क्यों होना चाहता है अल्बर्टा?

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कनाडा के अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग अचानक नहीं उठी है. इसके पीछे कई सालों से चल रही नाराजगी और अलग पहचान की भावना काम कर रही है. अल्बर्टा के कनाडा से अलग होने का सबसे बड़ा कारण आर्थिक है. अल्बर्टा तेल और गैस से भरपूर राज्य है. यहां कनाडा के कुल तेल उत्पादन का लगभग 84% हिस्सा निकलता है. यहां के लोगों को लगता है कि वे ज्यादा कमाते हैं, लेकिन फायदा बाकी कनाडा को ज्यादा मिलता है. उन्हें शिकायत है कि टैक्स का पैसा ओटावा जाकर खर्च होता है, जबकि फैसले लेते समय उनकी आवाज कम सुनी जाती है. (फोटो- सोशल मीडिया)

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केंद्र सरकार से टकराव

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दूसरा बड़ा मुद्दा केंद्र सरकार से टकराव है. ओटावा में बैठी सरकार के फैसलों को लेकर अल्बर्टा में नाराजगी रहती है. खासकर पर्यावरण और जलवायु से जुड़े नियमों को लेकर. यहां के लोग मानते हैं कि ये नियम उनके तेल और गैस उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं और बिना समझे बनाए जाते हैं. तीसरा कारण पहचान और राजनीति है. अल्बर्टा को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग माना जाता है. यहां की राजनीति ज्यादा कंजर्वेटिव (रूढ़िवादी) है, जबकि केंद्र में लंबे समय से लिबरल विचारधारा हावी रही है. इसके अलावा यहां यह भी भावना है कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण रखती है. पाइपलाइन, ऊर्जा परियोजनाएं और निर्यात जैसे मुद्दों पर कई बार फैसले अटकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ता है. (फोटो- सोशल मीडिया)

अल्बर्टा की आजादी की मांग में ट्रंप का भी हाथ?

अल्बर्टा की आजादी की मांग में ट्रंप का भी हाथ?8 / 9

इस बात से सीधे तौर पर तो इनकार नहीं किया जा सकता है कि अमेरिका का इस अलगाव के नारे में हाथ नहीं है. ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से कनाडा के साथ रिश्ते ठीक नहीं हैं, ट्रंप तो कनाडा को भी अमेरिका में मिलाने की बात कह चुके हैं, अल्बर्टा तो सिर्फ एक प्रांत है. अल्बर्टा के वर्तमान प्रीमियर डैनियल स्मिथ को इस अलगाववाद को हवा देने के लिए जिम्मेदार माना जाता है. डैनियल स्मिथ और ट्रंप के रिश्ते अच्छे हैं, ये बात किसी से छिपी नहीं है. (फोटो- सोशल मीडिया)

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क्यूबेक ने कनाडा से दो बार अलग होने की कोशिश की

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कनाडा में क्यूबेक का अलगाववाद अल्बर्टा से ज्यादा सालों पुराना है. यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा हुआ मुद्दा भी है. क्यूबेक की सबसे बड़ी खासियत उसकी फ्रेंच भाषा और उसकी अलग संस्कृति है. यहां के लोग खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानते हैं. उनका मानना रहा है कि उनकी भाषा और पहचान को बचाने के लिए ज्यादा स्वायत्तता या अलग देश बनना जरूरी है. (फोटो- सोशल मीडिया)

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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