
1 / 6
Venus Rise Impact: द्रिक पंचांग के अनुसार 1 फरवरी 2026 को शाम 06:27 बजे मकर राशि में शुक्र उदित हो चुके हैं. शुक्र वैदिक ज्योतिष में धन, वैभव, प्रेम और सुख का कारक ग्रह माना जाता है. यह ग्रह वैवाहिक सुख और मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है. हालांकि, शुक्र का उदय हो जाने के बाद भी तुरंत शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्य शुरू नहीं किए जा सकते हैं. आइए जानते हैं, ऐसा क्यों है और इसका ज्योतिषीय कारण क्या है?

2 / 6
बालत्व दोष और शिशु अवस्था - ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि किसी भी ग्रह का उदय होने के तुरंत बाद वह अपनी पूरी शक्ति प्राप्त नहीं करता. उदित ग्रह प्रारंभ में 'बाल्यावस्था' या शिशु अवस्था में माना जाता है. इस दौरान ग्रह का शुभ फल देने का प्रभाव सीमित होता है. इसे ज्योतिष में 'बालत्व दोष' कहा जाता है. यही कारण है कि शुक्र उदय के तुरंत बाद विवाह या मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना गया है.

3 / 6
उदय के बाद प्रभाव की अवधि - शुक्र 1 फरवरी 2026 को उदित हुए. शास्त्रानुसार ग्रह उदय के बाद कम से कम 3 से 5 दिन में ही अपनी पूर्ण शक्ति प्राप्त करता है. इस अवधि में ग्रह का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ता है. इसलिए उदय के तुरंत बाद मुहूर्त निकालना उचित नहीं माना जाता. यह समय ग्रह की परिपक्वता का प्रतीक माना जाता है.

4 / 6
कब है फरवरी 2026 में पहला विवाह - ज्योतिष के अनुसार, शुक्र के उदय के 3 से 5 दिन बाद ही वह पूर्ण रूप से प्रभावी होता है. इस वर्ष फरवरी में पहला दोषमुक्त विवाह मुहूर्त 5 फरवरी 2026 से शुरू हो रहा है. इस दिन से विवाह और अन्य मांगलिक कार्य करने के लिए शुक्र का प्रभाव शुभ माना जाता है.

5 / 6
क्यों महत्वपूर्ण है शुक्र का प्रभाव? - शुक्र न केवल प्रेम और वैवाहिक सुख का कारक है, बल्कि वैभव और सुख-शांति का भी प्रतीक है. विवाह मुहूर्त पर इसका प्रभाव सीधे रिश्तों की स्थिरता और खुशहाली से जुड़ा होता है. यदि शिशु अवस्था के दौरान कार्य किया जाए, तो शुभ परिणाम मिलने में देरी हो सकती है.

6 / 6
करें ये उपाय - ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि शुक्र के उदय के बाद पहले कुछ दिन शांति और ध्यान का समय माना जाता है. इस दौरान नई योजनाओं या मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए. घर में हल्के प्रकाश, फूल और शुभ कार्यों के प्रतीक रखकर इस अवधि को सरल और सकारात्मक बनाया जा सकता है.