1 नवंबर 2000 को बने छत्तीसगढ़ राज्य के नाम के पीछे कई दिलचस्प कहानियां और ऐतिहासिक मान्यताएं जुड़ी हैं. आखिर क्यों इस राज्य को छत्तीसगढ़ कहा जाता है और क्या है इसके नाम का असली मतलब?
छत्तीसगढ़ राज्य का गठन कब हुआ?

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छत्तीसगढ़ भारत का 26वां राज्य है, जिसका गठन 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर हुआ था. लंबे समय से अलग राज्य की मांग के बाद इसे स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिला. राजधानी के रूप में रायपुर को चुना गया.
प्राचीन काल में क्या था नाम?

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इतिहासकारों के मुताबिक, प्राचीन समय में इस इलाके को दक्षिण कौशल (दक्षिण कोसल) कहा जाता था. इसका जिक्र रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है. माना जाता है कि ये इलाका भगवान श्रीराम की माता कौशल्या की जन्मभूमि से जुड़ा रहा है.
36 गढ़ों से पड़ा नाम?

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छत्तीसगढ़ नाम के पीछे सबसे लोकप्रिय मान्यता ये है कि यहां कभी 36 किले या गढ़ हुआ करते थे. हिंदी में 'छत्तीस' का अर्थ 36 और 'गढ़' का अर्थ किला होता है. इसी वजह से इस क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा.
गोंड राजाओं का योगदान

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कई इतिहासकारों का मानना है कि लगभग 300 साल पहले गोंड शासकों के शासनकाल में यहां 36 प्रमुख किले थे. इन किलों की वजह से क्षेत्र को छत्तीसगढ़कहा जाने लगा और बाद में यही नाम लोकप्रिय हो गया.
कलचुरी शासकों से भी जुड़ा है नाम

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एक और मान्यता के मुताबिक, शिवनाथ नदी के उत्तर और दक्षिण में 18-18 गढ़ थे, जिन पर कलचुरी राजाओं का शासन था. कुल 36 गढ़ होने के कारण इस क्षेत्र को छत्तीसगढ़ कहा गया.
मराठा काल में बढ़ी पहचान

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इतिहास में दर्ज जानकारी के मुताबिक, 'छत्तीसगढ़' नाम मराठा शासनकाल में ज्यादा प्रचलित हुआ. वर्ष 1795 के एक अंग्रेजी सरकारी दस्तावेज में पहली बार 'छत्तीसगढ़' शब्द का आधिकारिक उल्लेख मिलता है. कुछ स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, छत्तीसगढ़ का नाम एक प्राचीन देवी मंदिर के 36 स्तंभों से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. हालांकि इतिहासकारों में इस विषय पर पूरी सहमति नहीं है.
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