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भारत में कानून सबके लिए समान है, लेकिन कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को स्पेशल सुरक्षा दी गई है. जानिए किन लोगों को उनके कार्यकाल के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और क्यों?
भारत में गिरफ्तारी का कानून

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भारत में कानून व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि सभी नागरिक कानून के सामने बराबर हैं. पुलिस को ये अधिकार है कि वो अपराध के संदेह या सबूत के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सके. लेकिन भारतीय संविधान कुछ ऐसे उच्च संवैधानिक पदों को स्पेशल सुरक्षा देता है, जिससे वे अपने कर्तव्यों का पालन बिना किसी दबाव, डर या राजनीतिक हस्तक्षेप के कर सकें. यही वजह है कि हर व्यक्ति पर गिरफ्तारी के नियम समान रूप से लागू नहीं होते.
क्या हर किसी को गिरफ्तार किया जा सकता है?

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आम धारणा यह है कि पुलिस किसी को भी कभी भी गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है. गिरफ्तारी के लिए सही वजह, सबूत और कानूनी प्रक्रिया जरूरी होती है. इसके अलावा, कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को कार्यकाल के दौरान स्पेशल छूट दी गई है. यह छूट उनके पद की गरिमा और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए दी जाती है, ताकि वो बिना किसी कानूनी दबाव के निर्णय ले सकें.
राष्ट्रपति को मिली विशेष सुरक्षा

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भारत के राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर होते हैं. संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति को कई तरह की कानूनी सुरक्षा दी गई है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन पूरी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ कर सकें, बिना किसी बाहरी दबाव के.
राष्ट्रपति की गिरफ्तारी पर रोक

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अनुच्छेद 361 के मुताबिक, राष्ट्रपति को उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी आपराधिक मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. इतना ही नहीं, उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही भी सीधे तौर पर शुरू नहीं की जा सकती. ये कानून इसलिए बनाया गया है ताकि देश के सर्वोच्च पद की गरिमा बनी रहे और कार्य में कोई बाधा न आए.
कार्रवाई का तरीका क्या है?

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अगर राष्ट्रपति के खिलाफ कोई गंभीर आरोप सामने आता है, तो उनके खिलाफ सीधे केस दर्ज नहीं किया जा सकता. इसके लिए संविधान में महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया तय की गई है. संसद के दोनों सदनों की सहमति से राष्ट्रपति को पद से हटाया जाता है. पद से हटने के बाद ही उनके खिलाफ सामान्य नागरिक की तरह कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
राज्यपाल को भी मिलती है सुरक्षा

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राज्यपाल, जो किसी राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, उन्हें भी अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति के समान कानूनी सुरक्षा मिलती है. ये सुरक्षा इसलिए दी गई है ताकि वो राज्य में निष्पक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें और किसी तरह के कानूनी दबाव में न आएं.
राज्यपाल की गिरफ्तारी पर भी रोक

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राज्यपाल को भी उनके कार्यकाल के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही सीधे शुरू नहीं की जा सकती. हालांकि, यह सुरक्षा केवल उनके पद पर रहते हुए ही लागू होती है. जैसे ही उनका कार्यकाल खत्म होता है या वो पद छोड़ते हैं, उनके खिलाफ सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
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