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मध्य प्रदेश के धार में मौजूद भोजशाला परिसर पर आज हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. इस जगह को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है. कोई इसे मां वाग्देवी का मंदिर मानता है तो कोई कमाल मौला मस्जिद. लेकिन अब हाई कोर्ट ने ये साफ कर दिया है कि धार भोजशाला एक मंदिर परिसर है. जानिए राजा भोज के समय से लेकर ASI सर्वे और हाई कोर्ट फैसले तक पूरा मामला.
क्या है धार भोजशाला विवाद?

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मध्य प्रदेश के धार जिले में मौजूद भोजशाला एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है. हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती यानी वाग्देवी का मंदिर और राजा भोज की संस्कृत शिक्षा स्थली मानता है. वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है, जहां सालों से नमाज अदा की जाती रही है. इसी दावे को लेकर ये विवाद कई दशकों से अदालत में चल रहा है.
राजा भोज से जुड़ा है इतिहास

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इतिहासकारों के मुताबिक, 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज ने ये भोजशाला बनवाई थी. कहा जाता है कि यहां संस्कृत, ज्योतिष और वेदों की शिक्षा दी जाती थी. हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां मां वाग्देवी की मूर्ति स्थापित थी और ये प्राचीन मंदिर परिसर था.
कमाल मौला मस्जिद का दावा

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मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ये परिसर कमाल मौला मस्जिद है और यहां लंबे समय से मुस्लिम समुदाय नमाज पढ़ता आया है. उनका दावा है कि इस स्थल का इस्तेमाल मस्जिद के रूप में होता रहा है और धार्मिक अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए. इसी वजह से ये मामला संवेदनशील बना हुआ है.
अंग्रेजों के समय से शुरू हुआ विवाद

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ब्रिटिश शासन के दौरान भोजशाला परिसर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था. धीरे-धीरे यहां पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर विवाद बढ़ता गया. बाद में प्रशासन ने अलग-अलग दिनों में हिंदू और मुस्लिम पक्ष को धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी.
ASI सर्वे क्यों हुआ?

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मामले की सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को वैज्ञानिक सर्वे करने का आदेश दिया गया. ASI ने करीब 98 दिनों तक परिसर का सर्वे किया और 2000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट अदालत में सौंपी. रिपोर्ट में कई प्राचीन संरचनाओं, शिलालेखों और मंदिरनुमा अवशेषों का जिक्र किया गया.
मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट पर उठाए सवाल

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मुस्लिम पक्ष ने ASI की रिपोर्ट पर सवाल उठाए और इसे पक्षपातपूर्ण बताया. अदालत में ये दलील दी गई कि सर्वे निष्पक्ष तरीके से नहीं हुआ. हालांकि ASI ने अदालत में कहा कि टीम में सभी समुदायों के सदस्य शामिल थे और सर्वे पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर किया गया.
2026 में आया बड़ा फैसला

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में इस मामले पर कई दिनों तक सुनवाई चली. दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक दस्तावेज, धार्मिक प्रमाण और ASI रिपोर्ट के आधार पर अपने-अपने तर्क रखे. कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था. 15 मई 2026 में हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने हिंदू पक्ष के दावों को स्वीकार किया और वाग्देवी की मूर्ति वापस स्थापित करने का रास्ता साफ हुआ. फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.
(All Photos Credit: Social Media)