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मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र ने बताया कि इस बार कुल बारिश का लगभग 92 फीसदी रहने का अनुमान है. हालांकि, इसमें 5 फीसदी तक की घट-बढ़ संभव है. मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रशांत महासागर में पनप रहा 'अल नीनो' इस बार मानसून की राह में सबसे बड़ी बाधा बन सकता है. मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जून के आसपास अल नीनो विकसित हो सकता है, जिससे मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है.
प्रचंड गर्मी का सामना करना होगा

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मानसून की सुस्ती के साथ-साथ दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के लोगों को फिलहाल प्रचंड गर्मी का सामना करना होगा. IMD के अनुसार, अगले सप्ताह तक अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. आने वाले दिनों में लोगों को लू के थपेड़े सहने पड़ सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है.
जून के आसपास अल नीनो विकसित

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IMD के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है, जबकि 1971 से 2020 के बीच का औसत 87 सेंटीमीटर रहा है. यानी इस बार बारिश सामान्य से थोड़ी कम रहने का अनुमान है. इसका मुख्य कारण अल नीनो की स्थिति को माना जा रहा है, जो मानसून को कमजोर कर सकती है. मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जून के आसपास अल नीनो विकसित हो सकता है.
क्या है राहत की खबर?

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कम बारिश के अनुमान के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि उत्तरी गोलार्द्ध में जनवरी से मार्च के बीच बर्फबारी सामान्य से कम रही है, जो भारतीय मानसून के लिए बेहतर संकेत माना जाता है. इसके अलावा, मानसून के दूसरे चरण में ‘पॉजिटिव इंडियन ओशन डायपोल’ (IOD) बनने की भी उम्मीद है. यह स्थिति हिंद महासागर में तापमान के बदलाव के कारण बनती है, जो अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कम कर भारत में अच्छी बारिश कराने में मदद कर सकती है.
मई में आएगा अपडेट

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मौसम विभाग ने कहा है कि वह मई के अंत में मानसून के इस पूर्वानुमान को फिर से अपडेट करेगा. तब तक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो जाएगी. फिलहाल, जून से सितंबर के बीच देश में करीब 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान लगाया गया है, जबकि सामान्य औसत 87 सेंटीमीटर रहता है. ऐसे में किसानों को अपनी फसलों की योजना सावधानी से बनाने की जरूरत है.