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केंद्र सरकार ने सोने के बाद अब चांदी के कुछ प्रोडक्ट्स और सिल्वर बार के आयात पर भी सख्ती कर दी है. सरकार ने इन्हें ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया है. ये फैसला विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और बढ़ते आयात को कंट्रोल करने के लिए लिया गया है.
सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?

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सरकार का कहना है कि बढ़ते आयात की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था. खासकर तेल कीमतों में तेजी के कारण ट्रेड डेफिसिट चिंता का विषय बना हुआ है. ऐसे में सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं के आयात को कंट्रोल करने के लिए ये कदम उठाया गया है.
हाल ही में बढ़ाई गई थी गोल्ड-सिल्वर ड्यूटी

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कुछ दिन पहले ही सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी थी. इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल है. सरकार का मकसद आयात कम करना और रुपये को मजबूती देना है.
किन सिल्वर प्रोडक्ट्स पर असर पड़ेगा?

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नई पाबंदियां खासतौर से हाई-प्योरिटी सिल्वर बार और कुछ विशेष ग्रेड की चांदी पर लागू होंगी. अब इन वस्तुओं को आयात करने के लिए डीजीएफटी यानी Directorate General of Foreign Trade से अनुमति लेनी होगी.
दुनिया में सबसे ज्यादा चांदी इस्तेमाल करता है भारत

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा सिल्वर उपभोक्ता माना जाता है. यहां चांदी का इस्तेमाल ज्वेलरी, सिक्के, सिल्वर बार और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बड़े स्तर पर होता है. सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV सेक्टर में भी चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है.
निवेशकों में बढ़ा सिल्वर का क्रेज

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पिछले एक साल में सिल्वर ETF और निवेश आधारित खरीदारी में रिकॉर्ड तेजी देखी गई है. शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और महंगाई के बीच लोग चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प मान रहे हैं. इसी वजह से सिल्वर की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. सरकार पहले भी थाईलैंड से आने वाले सिल्वर ज्वेलरी आयात पर सख्ती कर चुकी है. अधिकारियों को शक था कि कुछ व्यापारी ASEAN-India FTA का फायदा उठाकर कम ड्यूटी में चांदी आयात कर रहे थे. इसी वजह से अब निगरानी और कड़ी कर दी गई है.
(All Photos Credit: Social Media)