भारत की 3700000 जिंदगियों पर मंडराया 'महासंकट', भूकंप से दलदल बन सकती है वाराणसी की मिट्टी, पढ़ें चौंकाने वाली रिपोर्ट

भारत की 37 लाख जिंदगियों पर महासंकट मंडरा रहा है, यह दावा वैज्ञानिकों ने किया है। एक डिजिटल मैप और रिपोर्ट जारी हुई है, जिसके अनुसार भूकंप आया तो उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी काशी की मिट्टी दलदल बन सकती है। भूकंप विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट का यह खुलासा डराने और चौंकाने वाला है।

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दरअसल, वाराणसी में भूकंप के दौरान मिट्टी के दलदल में बदलने (साइल लिक्विफैक्शन) के खतरे पर वैज्ञानिक अध्ययन पूरा हो गया है। स्टडी रिपोर्ट के साथ एक नक्शा बनाया गया है, जिसमें बताया गया है कि भूकंप के तेज झटकों में शहर के कौन-कौन से इलाकों की मिट्टी दल-दल बन सकती है और वे धंस सकते हैं।

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वैज्ञानिकों ने की वाराणसी की डीप स्टडी

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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने मॉडर्न GIS मैपिंग और AHP टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से वाराणसी की स्टडी की और नक्शा तैयार किया। इस नक्शे में उन इलाकों को चिह्नित किया गया है, जिनकी मिट्टी भूकंप आने पर पानी के दबाव से दलदल जैसी हो सकती है। पिछले सप्ताह जर्मनी के मशहूर स्प्रिंगर नेचर डिस्कवर जियोसाइंस में रिसर्च प्रकाशित हुई है।

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मिट्टी के दलदल बनने की वजह गंगा नदी

मिट्टी के दलदल बनने की वजह गंगा नदी3 / 6

वैज्ञानिकों ने नक्शे के साथ जारी रिपोर्ट में इस संकट की वजह भी बताई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब किसी इलाके में नदी के किनारे पर ढीली रेतीली मिट्टी होती है और भूजल स्तर काफी ऊपर होता है तो भूकंप के तेज झटकों के कारण मिट्टी अपनी पकड़ खो देती है। तब जमीन ठोस नहीं रहती, बल्कि पानी के साथ मिलकर दलदल या गाद बन जाती हैं, जिसमें कई इमारतें धंस सकती हैं।

6 मानकों के आधार पर स्टडी की गई

6 मानकों के आधार पर स्टडी की गई4 / 6

वैज्ञानिकों ने वाराणसी की स्टडी 6 मानकों के आधार पर की। इनमें जमीन के अंदर 3 मीटर, 6 मीटर, 9 मीटर और 12 मीटर की गहराई पर मिट्टी के प्रकार, भूजल स्तर और भूकंपीय तरंगों की गति आदि शामिल हैं। 6 महीने तक राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के डॉ. अनुराग तिवारी, डॉ जेएल गौतम, BHU जियोफिजिक्स के प्रो. जीपी सिंह ने स्टडी की, जिसमें पता चला कि यहां जमीन के नीचे गहरे जलोढ़ यानी नदी द्वारा बहाकर लाई गई ढीली मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर हैं।

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स्टडी में दलदली मिली वाराणसी की मिट्टी

स्टडी में दलदली मिली वाराणसी की मिट्टी5 / 6

स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में अगर मिट्टी दलदल बनी तो गंगा किनारे की बलुआ और दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार (37.9 प्रतिशत) होगी। क्योंकि शहर के 7.52 प्रतिशत हिस्से में जमीन के नीचे 3 मीटर की गहराई पर मिट्टी दलदली है। 27.18 प्रतिशत इलाके की मिट्टी दलदल के मुहाने पर खड़ी है। वहीं 32.20 प्रतिशत इलाके की मिट्टी को समय रहते दलदल बनने से रोका जा सकता है। क्योंकि जमीन में गहराई बढ़ने पर मिट्टी ज्यादा होने के कारण उसके दलदल बनने का खतरा कम है, लेकिन दक्षिणी हिस्से में गंगा किनाने बने BHU-सुसुवाही कारिडोर पर धंसने का खतरा मंडर रहा है।

आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट किया

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वैज्ञानिकों की स्टडी और नक्शा वाराणसी जैसे घनी आबादी वाले और तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए चेतावनी है। साथ ही शहर के भविष्य के लिए एक गाइड मैप भी है। इसे भविष्य में स्मार्ट सिटी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का मौका मिलेगा। मेट्रो चलाने, मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाने और आपदा प्रबंधन के लिए नीति बनाने में मदद मिलेगी। रिसर्च टीम ने अपनी रिपोर्ट और नक्शा केंद्रीय मंत्रालय को सौंप दिया है। BHU और राज्य सरकार को भी रिपोर्ट दे दी गई है। को भी साझा की गई है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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