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LPG और PNG दोनों कुकिंग गैस हैं, फिर भी अलग-अलग हैं। केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी किया है, जिनके पास LPG गैस कनेक्शन है, उसे PNG कनेक्शन सरेंडर करना होगा। वहीं जिसके पास PNG कनेक्शन है, उसे LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
सिलेंडर और पाइपलाइन का अंतर

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LPG और PNG गैस में सप्लाई, संरचना, सुरक्षा, बिलिंग और कनेक्टिविटी और कैलोरी मान का अंतर होता है। LPG को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस और PNG को पाइप्ड नेचुरल गैस कहते हैं। LPG सिलेंडर में भरवाकर इस्तेामाल की जाती है। PNG पानी की तरह पाइपलाइन से सप्लाई होती है।
LPG भारी और PNG हल्की गैस

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LPG ब्यूटेन और प्रोपेन गैस का मिश्रण होता है, जबकि PNG में मीथेन गैस होती है। LPG गैस हवा से भारी होती है और अगर यह लीक होने पर जमीन पर गिर जाए तो जरा-सी चिंगारी मिलते ही आग पकड़ सकती है। वहीं PNG गैस हवा से हल्की होती है। अगर यह लीक हो जाए तो ऊपर की ओर उड़ जाती है।
LPG का प्री-पेमेंट और PNG का बिल

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LPG गैस सिलेंडर में भरी जाती है, जिसके पहले पहले से भुगतना करना पड़ता है। सिलेंडर बुक कराया जाएगा और डिलीवरी होने पर इसकी पेमेंट की जाएगी। जबकि PNG गैस का बिल आता है। महीने में जितनी गैस इस्तेमाल हुई है, मीटर से उसकी यूनिट चेक करके बिल बनाकर कस्टमर को दिया जाता है।
LPG पोर्टेबल और PNG पाइपिंग बाउंड

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LPG गैस पोर्टेबल होती और और छोटे सिलेंडर में इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है और कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। PNG गैस के साथ ऐसा नहीं है, क्योंकि इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क की जरूरत पड़ेगी, जिसे हर जगह ले जाना संभव नहीं। LPG गैस में आग का ताप ज्यादा होती है, PNG में कम होती है।
रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने संकट से निपटने के लिए 6 बड़े कदम उठाए हैं। रिफाइनरियों से LPG उत्पादन बढ़ाने को कहा है। बुकिंग और सप्लाई सिस्टम को बेहतर बनाया है। नया प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश 2026 भी लागू किया है, जिसके तहत आवश्यक गैस आपूर्ति के लिए रिफाइनरियों और GAIL के बीच को-ऑर्डिनेशन बढ़ाया गया है।
केरोसिन, कोयला और बायोमास होंगे विकल्प

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LNG के लिए अल्जीरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। 3 सदस्यीय मॉनिटरिंग पैनल गठित करके हालातों पर नजर रखने को कहा गया है। सरकार ने LPG के विकल्प के रूप में PDS के तहत केरोसिन की मात्रा बढ़ाई है, जो ग्रामीण और BPL परिवारों को दी जाएगी। कोयला और बायोमास का उपयोग भी बढ़ाने को कहा गया है।