गुजरात की 26 वर्षीय डॉली वदालिया के पास आधार कार्ड और पैन कार्ड है। 10वीं का सर्टिफिकेट, यूनिवर्सिटी की डिग्री, वोटर आईडी कार्ड और मैरिज सर्टिफिकेट भी हैं, लेकिन इन सबके बावजूद उसे भारतीय पासपोर्ट जारी करने से इनकार कर दिया गया है। क्योंकि वह इतने वैलिड डॉक्यूमेंट होने के बावजूद भी भारतीय नागरिक नहीं है।
बर्थ रजिस्ट्रेशन के कारण अटका मामला

2 / 6
दरअसल, मामला मामला उसके जन्म और जन्मस्थान के कारण अटका है। डॉली का जन्म विदेश में हुआ था, लेकिन बदकिस्मती से वह इस देश में भारतीय दूतावास में पंजीकरण नहीं करा पाई। भारतीय नागरिकता कानून के अनुसार विदेश में जन्मे भारतीय माता-पिता के बच्चों के लिए आवश्यक शर्त है कि जन्म के एक साल के अंदर उन्हें भारतीय दूतावास में जन्म पंजीकरण कराना होगा।
मोजाम्बिक में हुआ था डॉली का जन्म

3 / 6
डॉली वदालिया का जन्म 18 फरवरी 2000 को मोजाम्बिक के जाई-जाई प्रांत में हुआ था, जहां उनके पिता केतन बारिया और माता आरती थोक की किराने की दुकान थी। लेकिन जन्म के अगले दिन चक्रवाती तूफान के कारण देश में विनाशकारी बाढ़ आ गई, जिसने साउस मोजाम्बिक में तबाही मचा दी थी। घर तक बह गए थे, जिस वजह से डॉली को लेकर परिवार को पलायन करना पड़ा।
भारतीय दूतावास में बर्थ रजिस्ट्रेशन नहीं

4 / 6
बाढ़ का जलस्तर बढ़ने और बीमारियों के फैलने के डर से मोजाम्बिक में रहने वाले भारतीय परिवार देश छोड़कर जाने लगे। डॉली के परिवार ने भी भारतीय दूतावास के अधिकारियों से आपातकालीन प्रमाण पत्र प्राप्त किया और पहले हेलीकॉप्टर से मापुटो गए। फिर 18 दिन की डॉली को लेकर वापस भारत लौट आए। इस अफरा-तफरी में भारतीय दूतावास में उसका जन्म पंजीकरण नहीं हुआ।
किसी देश की आधिकारिक निवासी नहीं

5 / 6
आज बर्थ रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और रिकॉर्ड न होने के कारण वह भारतीय पासपोर्ट नहीं बनवा सकती। पासपोर्ट नहीं है तो वह देश छोड़कर कनाडा में अपने पति के पास रहने के लिए नहीं जा सकती। यहां तक कि यह भी साबित नहीं कर सकती कि वह आधिकारिक तौर पर दुनिया में कहीं की निवासी है। पति के पास न जा सकने के कारण उसकी शादीशुदा जिंदगी भी संघर्ष कर रही है।
2 बार रिजेक्ट हो चुका पासपोर्ट एप्लिकेशन

6 / 6
भारतीय पासपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, डॉली को पहले भारतीय नागरिकता का प्रमाण देना होगा। उसके पासपोर्ट आवेदनों को 2 बार यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह वंश के आधार पर भारतीय नागरिक बनने में विफल रही हैं, क्योंकि उनके जन्म को मोजाम्बिक में भारतीय दूतावास में पंजीकृत नहीं किया गया था। भारत आने के लिए बनवाया इमरजेंसी सर्टिफिकेट भी अब अनवैलिड हो चुका है।