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हिमालय की गोद में बसा लेह का कुशोक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डा भारत का सबसे ऊंचा एयरपोर्ट है. यह समुद्र तल से 3,256 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और चारों ओर बर्फीले पहाड़ों से घिरा है.
खतरनाक लैंडिंग

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पहाड़ों के बीच तंग घाटी में बना इसका रनवे दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण रास्तों में से एक माना जाता है. यहां विमान उतारने के लिए पायलटों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है क्योंकि यहाँ का मौसम पल भर में बदल जाता है.
सुबह की उड़ानें

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हवा के दबाव और कम दृश्यता के कारण इस एयरपोर्ट पर उड़ानें केवल सुबह के समय ही संचालित होती हैं. दोपहर के बाद तेज हवाओं की वजह से यहां टेक-ऑफ और लैंडिंग करना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता है.
अद्भुत नजारे

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लेह की उड़ान किसी रोमांचक सफर से कम नहीं है क्योंकि विमान की खिड़की से हिमालय का विहंगम दृश्य दिखता है. यात्री आसमान से बलखाती नदियों और सफेद चादर से ढकी चोटियों का शानदार नजारा देख सकते हैं.
सेहत का ख्याल

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ज्यादा ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण यहाँ पहुंचने वाले पर्यटकों को सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी हो सकती है. डॉक्टरों की सलाह है कि यहां उतरने के बाद पहले दिन भरपूर आराम करना और ज्यादा पानी पीना बहुत जरूरी है.
सेना का पहरा

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नागरिक उड़ानों के अलावा यह एयरपोर्ट भारतीय वायु सेना के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सीमावर्ती इलाका होने के कारण यहां से सेना के साजो-सामान की सप्लाई और निगरानी का काम चौबीसों घंटे चलता है.