
1 / 7
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है. तमिलनाडु के कल्पक्कम में बने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है. इसमें यूरेनियम की जगह थोरियम का इस्तेमाल होता है.
क्या है बड़ी कामयाबी?

2 / 7
भारत ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में अपने पहले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) में बड़ी सफलता हासिल की है. ये रिएक्टर अब 'क्रिटिकलिटी' की स्थिति में पहुंच चुका है, यानी इसमें controlled nuclear chain reaction शुरू हो गई है.
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या होता है?

3 / 7
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर खास इसलिए होता है क्योंकि ये जितना फ्यूल इस्तेमाल करता है, उससे ज्यादा नया ईंधन भी तैयार करता है. यानी ये खुद अपना फ्यूल ब्रीड करता है, जिससे एनर्जी प्रोडक्शन लंबे समय तक जारी रह सकता है.
कल्पक्कम रिएक्टर की खासियत

4 / 7
ये रिएक्टर 500 मेगावाट क्षमता का है और इसमें लिक्विड सोडियम कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. इसे पूरी तरह भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने विकसित किया है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है.
यूरेनियम की जगह थोरियम

5 / 7
भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है, जिससे देश को 700 साल तक बिजली मिल सकती है. भविष्य में इसी थोरियम से ऊर्जा पैदा करने की योजना है, जिससे भारत को लंबे समय तक सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा मिल सकती है. इस तकनीक की मदद से परमाणु बिजली बनाने के लिए यूरेनियम की जगह थोरियम का इस्तेमाल किया जाएगा. अभी भारत यूरेनियम के लिए रूस और ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर है.
कैसे काम करता है ये रिएक्टर?

6 / 7
यह रिएक्टर प्लूटोनियम और यूरेनियम मिक्स फ्यूल (MOX) का इस्तेमाल करता है. साथ ही यह थोरियम से यूरेनियम-233 बनाने में मदद करता है, जो आगे चलकर एनर्जी प्रोडक्शन में इस्तेमाल होगा.
70 साल से पहले देखा था सपना

7 / 7
भारत के वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने 70 साल पहले ही इस तकनीक पर काम करना शुरू कर दिया था, जिसमें अब जाकर कामयाबी मिली. इसे बनाने में करीब 90 करोड़ डॉलर खर्च हुए हैं
(All Photos Credit: AI)