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भारत में एक ऐसा शहर है जहां की गलियों और चौराहों पर इतिहास सांस लेता है और पत्थरों पर भक्ति की गाथाएं लिखी गई हैं. यहाँ कदम-कदम पर बने प्राचीन मंदिर सैलानियों को एक अलग ही दुनिया का अहसास कराते हैं जो सदियों पुरानी संस्कृति को समेटे हुए है.
किसे कहते हैं 'टेंपल सिटी ऑफ इंडिया'?

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ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को आधिकारिक तौर पर भारत का 'मंदिरों का शहर' कहा जाता है क्योंकि यहाँ मंदिरों की संख्या किसी भी अन्य शहर से ज्यादा है. कभी यहाँ 2000 से भी ज्यादा मंदिर हुआ करते थे जिनमें से आज भी 700 से अधिक सुरक्षित खड़े हैं जो इस जगह की पहचान हैं.
क्या है कलिंग शैली का जादू?

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भुवनेश्वर के ज्यादातर मंदिर खास कलिंग वास्तुकला में बने हैं जो अपनी ऊंची घुमावदार मीनारों और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के लिए मशहूर हैं. ये मंदिर किसी बाउंड्री में कैद नहीं हैं बल्कि बाजारों और घरों के बीच इस तरह घुले-मिले हैं कि शहर का अटूट हिस्सा बन गए हैं.
कौन सा मंदिर है सबसे खास?

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इस आध्यात्मिक शहर के केंद्र में 11वीं सदी का विशाल लिंगराज मंदिर खड़ा है जो भगवान शिव को समर्पित है. एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना यह मंदिर आज भी सक्रिय है जहाँ सुबह से शाम तक घंटियों और मंत्रों की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहता है.
क्या हैं यहां के अन्य मशहूर मंदिर?

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लिंगराज के अलावा यहां मुक्तेश्वर मंदिर, राजारानी मंदिर और अनंत वासुदेव मंदिर जैसे कई ऐतिहासिक रत्न मौजूद हैं जो कला के बेजोड़ नमूने हैं. ये मंदिर केवल खंडहर नहीं हैं बल्कि आज भी यहाँ लोग पूजा-अर्चना करते हैं और पुरानी परंपराओं को जिंदा रखे हुए हैं.
क्या है 'गोल्डन ट्रायंगल' का राज?

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भुवनेश्वर के साथ पुरी और कोणार्क को मिलाकर 'स्वर्ण त्रिभुज' कहा जाता है जो ओडिशा के पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. इतिहास और अध्यात्म का यह संगम भुवनेश्वर को पूरी दुनिया में एक अलग और खास पहचान दिलाता है जहाँ हर पत्थर कुछ कहता है.