Divorce Alimony Rules: तलाक के बाद एलीमनी कैसे होती है तय, जानिए इसे लेकर क्या है कानून?

तलाक या कानूनी तरीके से अलगाव के बाद गुजारे भत्ता तय किया जाता है, जो पति और पत्नी दोनों को मिल सकता है। इसके लिए देश के संविधान में कुछ कानून बनाए गए हैं। न केवल हिंदू धर्म में, बल्कि हर धर्म में इसके लिए कानून बने हैं। न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर के कई देशों में तलाक के गुजारे भत्ते का प्रावधान है।

DIVORCE ALIMONY RULES
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गुजारा भत्ता तलाक के बाद पति या पत्नी को मिलने वाली आर्थिक मदद होती है। पति के द्वारा पत्नी को या पत्नी के द्वारा पति को गुजारा भत्ता तब दिया जाता है, जब दोनों में कोई आर्थिक रूप से हो और अपने गुजर बसर के लिए खर्च करने में सक्षम न हो। रहने, खाने और रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान में रखते हुए गुजारा भत्ता दिया जाता है।

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मासिक या एकमुश्कत हो सकता गुजारा भत्ता

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बता दें कि भारत में गुजारे भत्ते के नियम हर धर्म के लिए अलग-अलग कानूनों के तहत तय किए गए हैं। वहीं गुजारे भत्ते की रकम कमाई, प्रॉपर्टी, आश्रित, उम, स्वास्थ्य, दोष और आचरण के आधार पर तय की जाती है। गुजारे भत्ता मासिक दिया जा सकता है या एक बार में इकट्ठा भी दिया जा सकता है, यह पति-पत्नी की इच्छा पर निर्भर है।

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इस आधार पर तय किया जाता है गुजारा भत्ता

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गुजारा भत्ता तय करते समय भारतीय अदालतें कुछ बातों का ध्यान रखती हैं। जैसे पति या पत्नी की इनकम कितनी है? पति या पत्नी का रहन-सहन कैसा है? पति या पत्नी के पास बच्चों की कस्डटी या परवरिश का खर्च है या नहीं? पति या पत्नी दोनों में कोई दिव्यांग या बीमारी का शिकार तो नहीं? पति-पत्नी के व्यवहार पर भी विचार किया जाता है।

धर्मों के अनुसार गुजारे भत्ते के लिए कानूनी अधिकार

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बता दें कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955) की धारा 25 के तहत पत्नी या पति दोनों गुजारे भत्ते के लिए हकदार हैं और दोनों गुजारे भत्ते के लिए दावा कर सकते हैं। धारा 24 के अनुसार, तलाक की कार्यवाही के दौरान भी गुजारा भत्ता मांगा जा सकता है। मुस्लिम कानून 1986 के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को इद्दत के दौरान गुजारे भत्ते या मेहर की रकम पाने का पूरा हक होता है। ईसाई कानून 1869 की धारा 36 और 37 के तहत पत्नी गुजारे भत्ते की हकदार है। विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत इंटर रिलीजन या कोर्ट मैरिज करने पर धारा 36 और 37 के तहत गुजारे भत्ते का प्रावधान किया गया है।

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गुजारे भत्ते को लेकर अन्य देशों में कानून

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बता दें कि ब्रिटेन में पति-पत्नी के जीवन स्तर को बैलेंस रखते हुए गुजारा भत्ता तय किया जाता है। जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में अल्पकालिक वित्तीय सहायता को प्राथमिकता दी जाती है। चीन-जापान में गुजारा भत्ता असामान्य है और इन देशों में एकमुश्त गुजारा भत्ता दिया जाता है। मिडिल ईस्ट के देशों में शरिया कानून का पालन होता है तो इस देशों में गुजारा भत्ता अल्पकालिक होता है, जो तलाक के बाद सिर्फ वेटिंग पीरियड तक की दिया जाता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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