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गुजारा भत्ता तलाक के बाद पति या पत्नी को मिलने वाली आर्थिक मदद होती है। पति के द्वारा पत्नी को या पत्नी के द्वारा पति को गुजारा भत्ता तब दिया जाता है, जब दोनों में कोई आर्थिक रूप से हो और अपने गुजर बसर के लिए खर्च करने में सक्षम न हो। रहने, खाने और रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान में रखते हुए गुजारा भत्ता दिया जाता है।
मासिक या एकमुश्कत हो सकता गुजारा भत्ता

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बता दें कि भारत में गुजारे भत्ते के नियम हर धर्म के लिए अलग-अलग कानूनों के तहत तय किए गए हैं। वहीं गुजारे भत्ते की रकम कमाई, प्रॉपर्टी, आश्रित, उम, स्वास्थ्य, दोष और आचरण के आधार पर तय की जाती है। गुजारे भत्ता मासिक दिया जा सकता है या एक बार में इकट्ठा भी दिया जा सकता है, यह पति-पत्नी की इच्छा पर निर्भर है।
इस आधार पर तय किया जाता है गुजारा भत्ता

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गुजारा भत्ता तय करते समय भारतीय अदालतें कुछ बातों का ध्यान रखती हैं। जैसे पति या पत्नी की इनकम कितनी है? पति या पत्नी का रहन-सहन कैसा है? पति या पत्नी के पास बच्चों की कस्डटी या परवरिश का खर्च है या नहीं? पति या पत्नी दोनों में कोई दिव्यांग या बीमारी का शिकार तो नहीं? पति-पत्नी के व्यवहार पर भी विचार किया जाता है।
धर्मों के अनुसार गुजारे भत्ते के लिए कानूनी अधिकार

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बता दें कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955) की धारा 25 के तहत पत्नी या पति दोनों गुजारे भत्ते के लिए हकदार हैं और दोनों गुजारे भत्ते के लिए दावा कर सकते हैं। धारा 24 के अनुसार, तलाक की कार्यवाही के दौरान भी गुजारा भत्ता मांगा जा सकता है। मुस्लिम कानून 1986 के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को इद्दत के दौरान गुजारे भत्ते या मेहर की रकम पाने का पूरा हक होता है। ईसाई कानून 1869 की धारा 36 और 37 के तहत पत्नी गुजारे भत्ते की हकदार है। विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत इंटर रिलीजन या कोर्ट मैरिज करने पर धारा 36 और 37 के तहत गुजारे भत्ते का प्रावधान किया गया है।
गुजारे भत्ते को लेकर अन्य देशों में कानून

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बता दें कि ब्रिटेन में पति-पत्नी के जीवन स्तर को बैलेंस रखते हुए गुजारा भत्ता तय किया जाता है। जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में अल्पकालिक वित्तीय सहायता को प्राथमिकता दी जाती है। चीन-जापान में गुजारा भत्ता असामान्य है और इन देशों में एकमुश्त गुजारा भत्ता दिया जाता है। मिडिल ईस्ट के देशों में शरिया कानून का पालन होता है तो इस देशों में गुजारा भत्ता अल्पकालिक होता है, जो तलाक के बाद सिर्फ वेटिंग पीरियड तक की दिया जाता है।