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भारत माता के रक्षा के लिए बलिदान होने वाले जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 9 अप्रैल का दिन शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान के युद्ध में CRPF के जवानों की पैदल टुकड़ी ने गुजरात में कच्छ के रण में दुश्मनों का सामना किया था और सरदार पोस्ट पर वापस तिरंगा फहराया था।
गुजरात में सरदार पोस्ट पर हमला किया था

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9 अप्रैल 1965 को पाकिस्तानी 51 इन्फैन्ट्री ब्रिगेड ने डेजर्ट हॉक नामक ऑपरेशन के तहत भारत की सरदार पोस्ट पर हमला किया। वहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 2 टुकड़ियां तैनात थीं और कुल 150 जवान थे। जबकि 8 फ्रंटियर राइफल, 18 पंजाब बटालियन और 6 बलूच बटालियन समेत 3500 पाकिस्तानी जवानों ने रात के अंधेरे में हमला किया था।
पाकिस्तान के 3500 जवानों ने हमला किया था

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एक और भारत के 150 जवान और दूसरी ओर पाकिस्तान के 3500 जवान, फिर भी भारतीय जवानों ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। पाकिस्तानी सेना के इरादे सरदार पोस्ट कब्जाकर गुजरात में घुसने के थे, लेकिन सरदार पोस्ट के पूर्वी किनारे पर तैनात CRPF के हेड कॉन्स्टेबल भावना राम ने गुजरात पुलिस के साथ मिलकर दुश्मन के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया।
पोस्ट पर कब्जा करने की 3 बार कोशिश की

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भावना राम ने गुजरात की स्टेट रिजर्व पुलिस (SRP) के जवानों को बुलाया और फिर सभी ने मिलकर पैदल दुश्मन के जवानों का मुकाबला किया। दुश्मन सेना ने सरदार पोस्ट पर कब्जा करने की 3 बार कोशिश की, लेकिन CRPF जवानों की स्ट्रेटेजी के आगे वे फेल हो गए। सिर्फ 12 घंटे लड़ाई चली और भारतीय जवानों ने दुश्मन को पीठा दिखाकर भागने पर मजबूर कर दिया।
CRPF के 6 जवानों ने जीवन बलिदान किया था

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गुजरात में कच्छ के रण में रेतीली धरती पर लड़ी गई जंग में भारत ने अपने 6 जवान खोए, लेकिन दुश्मन की सेना के 34 जवानों को ढेर कर दिया था। 4 दुश्मनों को जिंदा पकड़ लिया था। पाकिस्तानी अपने सभी जवानों के शव छोड़कर भाग गए। देश की रक्षा के लिए जीवन बलिदान करने वाले 6 वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए ही हर साल शौर्य दिवस मनाया जाता है।
भारत-पाक युद्ध के बाद BSF का गठन किया गया

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बता दें कि 1965 तक भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी CRPF के कंधों पर ही थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल का गठन किया गया। CRPF को देश के अंदर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी CRPF ने साल 2001 में भी दिल्ली में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले में बहादुरी दिखाते हुए सभी आतंकी मार गिराए थे।