कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ईपीएफ स्कीम 2026 को नोटिफाई कर दिया है, जिसमे तहत 3 योजनाओं को अपडेट किया गया है। इनमें से एक स्कीम 74 साल, दूसरी 31 साल और तीसरी 50 साल पुरानी है। इन तीनों स्कीम को 'सोशल सिक्योरिटी कोड' के तहत अपडेट किया गया है।
12 प्रतिशत से ज्यादा PF स्वैच्छिक योगदान होगा

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EPF Scheme 2026 के तहत पीएफ कंट्रीब्यूशन के 12 प्रतिशत के योगदान की लिमिट को बरकरार रखा गया है, यानी 15000 रुपये प्रति माह सैलरी पर 12 प्रतिशत PF ही कटेगा। इससे ज्यादा PF कटवाया जाएगा तो उसे स्वैच्छिक यानी अपनी मर्जी से किया गया योगदान माना जाएगा। अगर सैलरी 1 लाख रुपये प्रति माह है तो 1800 रुपये PF कटेगा। कंपनी भी 1800 रुपये ही देगी। बची हुई सैलरी में से कुछ हिस्सा रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए जमा कर सकेंगे। कर्मचारी स्वैच्छिक एक्स्ट्रा पीएफ कंट्रीब्यूशन का ऑप्शन चुन सकते हैं। कंपनी चाहे तो कर्मचारी के द्वारा किए जा रहे स्वैच्छिक योगदान के बराबर योगदान दे सकती हैं, लेकिन ऐसा करना उनके लिए अनिवार्य बिल्कुल भी नहीं है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों किसी भी समय एक्स्ट्रा कंट्रीब्यूशन को कम या बंद कर सकते हैं।
PF निकालने का नियम भी बदला

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EPF Scheme 2026 के तहत खाते से पैसे निकालने का नियम भी बदल दिया गया है। नई स्कीम में पैसे निकालने (विड्रॉल) से जुड़े उन नियमों को लागू किया गया है, जिन्हें पिछले साल अक्टूबर में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) ने मंजूरी दी थी। अब पैसे निकालने के लिए 13 नहीं सिर्फ कैटेगरी होंगी। अब कर्मचारी बीमारी के समय, शिक्षा या विवाह के लिए, कोई खरीदारी करने, निर्माण कार्य और आवास संबंधित अन्य खर्च के लिए या अन्य आपातकालीन स्थितियों में ही पीएफ निकलवा सकेंगे।
PF खाते में 25 प्रतिशत फंड रखना अनिवार्य

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EPF Scheme 2026 के तहत खाताधारकों को पीएफ अकाउंट से 100% पैसा निकालने की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें खातों में कम से कम 25% पैसा रखना ही होगा, ताकि रिटायरमेंट फंड का एक हिस्सा सुरक्षित रहें। कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारियों के लिए नियम अलग है। पीएफ अकाउंट में कितना कॉन्ट्रिब्यूशन करना है, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों पर ही डाली गई है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन का पेमेंट करने के लिए प्रिंसिपल एम्प्लॉयर तभी जिम्मेदार होगा, जब कॉन्ट्रैक्टर अलग से रजिस्टर्ड न हो।
कंपनियों के लिए नए नियमों में क्या बदला

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EPF Scheme 2026 के तहत कंपनी को कई तरह के नियमों का पालन करना होगा। फाइलिंग से जुड़े नियम भी मानने होंगे, जिनमें एक बार हर महीने और किसी खास घटना से जुड़े नियमों का पालन शामिल है। कंपनियों को नई स्कीम लागू होने के बाद 15 दिन के अंदर Form-V में कंसोलिडेटेड रिटर्न डिटेल देनी होगी, जिसमें सभी कर्मचारियों का रिकॉर्ड और डेटा शामिल होगा। जिसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, UAN नंबर, ग्रॉस वेज और ईपीएफ वेज की डिटेल शामिल होगी।
इन 3 स्कीमों को बदला गया

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केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) 2026 ने स्कीम एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) 1952 की जगह ली है। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 2026 स्कीम ने एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम 1995 की जगह ली है। वहीं एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLIS) 2026 ने एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLIS) 1976 की जगह ली है। नई योजनाओं को सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) 2020 के तहत 29 जून 2026 से लागू किया गया है।