अगर आपने नौकरी और कंपनी बदल ली है और 2 UAN-PF अकाउंट नजर आ रहे हैं तो उन्हें मर्ज करना होगा और पैसा भी ट्रांसफर करना होगा। इसके लिए ईमेल के माध्यम से भी मर्ज करने का अनुरोध EPFO को भेजें। कर्मचारी uanepf@epfindia.gov.in पर ईमेल भेजकर पिछले UNA और नए UAN को मर्ज करने की रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
ऑफिशियल पोर्टल से ऑनलाइन मर्ज करें

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कर्मचारी EPFO के ऑफिशियल पोर्टल से भी ऑनलाइन अकाउंट मर्ज कर सकते हैं और ऑनलाइन अमाउंट ट्रांसफर की रिक्वेस्ट भेज सकते हैं, लेकिन इसके लिए UAN एक्टिव होना चाहिए और आधार कार्ड, बैंक अकाउंट से लिंक होना चाहिए। शर्तें पूरी करने के बाद EPFO के ऑफिशियल पोर्टल पर लॉगइन करें। UNA और पासवर्ड से ही लॉगइन होगा। अगर पासवर्ड भूल गए हैं तो रीसेट कर सकते हैं।
पर्सनल और कंपनी डिटेल वेरिफाई करें

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ऑफिशियल पोर्टल लॉगइन करने के बाद ऑनलाइन सर्विस मैन्यू से 'एक सदस्य, एक ईपीएफ खाता' विकल्प चुनें। एक विंडो खुलेगी, जिसमें आपकी पर्सनल डिटेल और वर्तमान कंपनी का PF खाता नजर आएगा, जहां अमाउंट ट्रांसफर किया जाएगा। अपनी पर्सनल डिटेल और वर्तमान कंपनी की डिटेल वेरिफाई करें। इसके बाद अपना पिछला UAN और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर सबमिट करके OTP जनरेट करें।
मर्ज किए जाने वाले खाते सेलेक्ट करें

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रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए OTP को सबमिट करके वेरिफिकेशन करें। इसके बाद पुराने PF खातों की डिटेल डालें, जिन्हें नए खाते में मर्ज किया जाना है।
रिक्वेस्ट सबमिट करने से पहले दिए गए बॉक्स में टिक मार्क करें। क्लेम को वेरिफाई करने के लिए पिछली या वर्तमान कंपनी में से किसी एक को चुने। OTP वेरिफिकेशन करने के बाद रिक्वेस्ट सबमिट कर दें। वर्तमान कंपनी पोर्टल पर मर्जर रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करेगी और फिर EPFO खातों को मर्ज करके पैसा ट्रांसफर कर देगा।
PF अकाउंट ऑटोमैटिक कब ट्रांसफर होंगे?

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ऑटोमैटिक PF अकाउंट ट्रांसफर सिस्टम कुछ शर्तों पर काम करता है। जैसे आधार कार्ड और बैंक अकाउंट लिंक होना चाहिए। केवाईसी रिकॉर्ड अपडेट होने चाहिए। पिछली कंपनी छोड़ने की तारीख सिस्टम में दर्ज होनी चाहिए। पुरानी और नई कंपनी का EPFO में डिजिटली रिजस्टर्ड होना अनिवार्य है। नई कंपनी खुद कर्मचारी के पुराने अकाउंट को नए में मर्ज करने का प्रोसेस कर सकती है।
PF अकाउंट मर्ज करने पर टैक्स छूट मिलेगी

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PF अकाउंट मर्ज करने का लाभ यह है कि कर्मचारी की सर्विस हिस्ट्री आगे बढ़ती है। इसे नौकरी के साल काउंट होते रहते हैं, ऐसा नहीं कि नई कंपनी में जीरो से शुरुआत हो रही। ऐसा होने पर EPF से निकाला जाने वाला पैसा 5 साल की निरंतर सेवा के बाद करमुक्त होता है। अगर पैसा 5 साल की नौकरी से पहले निकाल लिया जाएगा तो अमाउंट टैक्सेबल हो सकता है। फिर PF अमाउंट और कुल आय के आधार पर टैक्स लागू हो सकता है।