भारत में दहेज लेना और देना कानूनन अपराध है, लेकिन आज भी दहेज के नाम पर सरकारी नौकरी, IAS, IIT और अच्छी सैलरी वाले लड़कों की कीमत तय होती है. समाज में शिक्षा और नौकरी के आधार पर दहेज मांगने की मानसिकता अब भी गहरी जड़ें जमाए हुए है. हाल ही में हुए कई मामलों ने इस गंभीर सामाजिक समस्या को फिर चर्चा में ला दिया है.
कैसे तय हो रही 'दूल्हे की कीमत'

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भारत में दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए 1961 में कानून बनाया गया था, लेकिन आज भी कई परिवारों में सरकारी नौकरी या बड़ी डिग्री वाले लड़कों की कीमत तय की जाती है. हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स में बताया गया कि IAS, IIT, डॉक्टर और सरकारी अफसरों के लिए लाखों रुपये तक दहेज मांगा जाता है.
सरकारी नौकरी वालों की सबसे ज्यादा मांग

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सोसाइटी में आज भी सरकारी नौकरी को स्थायी और प्रतिष्ठित माना जाता है. इसी वजह से SSC, UPSC, बैंकिंग या रेलवे जैसी नौकरियां पाने वाले युवकों के लिए दहेज की रकम कई गुना बढ़ जाती है. कई मामलों में परिवार खुले तौर पर कार, फ्लैट, नकदी और महंगे गिफ्ट की मांग करते हैं.
IIT-IAS टैग बना स्टेटस सिंबल

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रिपोर्ट के मुताबिक, कई राज्यों में IIT और IAS जैसे टैग शादी के बाजार में स्टेटस सिंबल बन चुके हैं. लड़के की डिग्री जितनी बड़ी, दहेज की मांग उतनी ज्यादा मानी जाती है. इससे पढ़ाई और नौकरी को भी आर्थिक सौदे की तरह देखा जाने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक IAS, IPS आराम से 1 करोड़ से लेकर 5 करोड़ तक का दहेज मांग लेते हैं
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किसको मिलता है कितना दहेज

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अगर लड़का डॉक्टर या इंजीनियर है तो उसे आराम से 20 लाख से लेकर 1 करोड़ तक का दहेज मिल जाता है. सरकारी क्लर्क और टीचर्स को 5 से 15 लाख रुपये तक दहेज मिलता है. इसके अलावा गाड़ी, गहने और बाकी सामान भी दिया जाता है.