11000 फीट ऊंचाई, 30KM लंबाई... जानें दुनिया की सबसे लंबी सुरंग जोजिला टनल की खासियतें और क्या होंगे इसके फायदे?

लद्दाख और कश्मीर घाटी के बीच सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण महीनों तक कट जाने वाले दिन अब इतिहास बन जाएंगे. आज यानी मंगलवार को देश के लिए एक ऐतिहासिक पल है. देश की सबसे लंबी और सबसे चुनौतीपूर्ण जोजिला सुरंग (Zojila Tunnel) का आज ब्रेकथ्रू होने जा रहा है. यानी सुरंगा दोनों अपने दोनों छोर से मिल जाएगी और यह आज से ही लोगों के लिए आर-पार खुल जाएगी. बता दें कि सर्दियों में जोजिला पर आठ से दस फीट तक बर्फ गिरने से लद्दाख का सड़क संपर्क पूरे देश से कट जाता है.

zojila tunnel
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कितनी है जोजिला की ऊंचाई?

कितनी है जोजिला की ऊंचाई?2 / 7

बता दें कि जोजिला की ऊंचाई 11,500 फीट से भी ज्यादा है. फरवरी 2028 तक सुरंग का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है. यह सुरंग एक तरफ भगवान श्रीअमरनाथ यात्रा के आधार शिविर बालटाल को लद्दाख के द्रास जिले के मीनामार्ग से जोड़ेगी. दोनों ओर से खोदाई का ज्यादातर काम पूरा हो चुका है.

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क्या है इस टनल की खासियत?

क्या है इस टनल की खासियत?3 / 7

इस टनल के बनने और शुरू होने के बाद लेह (लद्दाख) और श्रीनगर का संपर्क इस सुरंग के माध्यम से हमेशा के लिए जुड़ जाएगा. 13.153 KM लंबी इस रणनीतिक और बेहद महत्वपूर्ण सुरंग का मुख्य निर्माण कार्य पूरा होते ही, भारतीय सेना और आम नागरिकों को लद्दाख तक हर मौसम (सदाबहार) में सुरक्षित संपर्क मिलेगा. बर्फबारी के कारण लद्दाख का कई माह तक देश से सड़क संपर्क कट जाता है, लेकिन इस सुरंग के बन जाने से ऐसा नहीं होगा. कश्मीर के सोनमर्ग के पास जेड-मोड़ टनल पहले ही शुरू हो चुकी है. ऐसे में जोजिला सुरंग पूरी होने के बाद लद्दाख से सर्दियों में भी संपर्क बना रहेगा.

3.5 घंटे का सफर 15 मिनट में होगा पूरा

3.5 घंटे का सफर 15 मिनट में होगा पूरा4 / 7

जोजिला टनल का निर्माण कार्य पूरा होने का लक्ष्य सरकार ने फरवरी, 2028 तक रखा है. उसके बाद जोजिला को पार करने में लगने वाला साढ़े तीन घंटे का समय मात्र 15 मिनट का हो जाएगा. इससे लद्दाख साल भर सड़क मार्ग से देश से जुड़ा रहेगा.

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जोजिला पास रणनीतिक रूप से भी है अहम

जोजिला पास रणनीतिक रूप से भी है अहम5 / 7

जोजिला सुरंग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. इसके बनने से पाकिस्तान और चीन से लगती सीमा के अग्रिम इलाकों तक सेना का साजो सामान जल्द पहुंचने से ऑपरेशनल तैयारियों को तेजी मिलेगी.

परियोजना पर एक नजर

परियोजना पर एक नजर 6 / 7

परियोजना की शुरुआत: 1 अक्टूबर 2020 कुल परियोजना लंबाई (पहुंच मार्ग सहित): 30.894 किमी मुख्य जोजिला टनल की लंबाई: 13.153 किमी निलग्रार टनल (T1 और T2): क्रमशः 457.35 मीटर और 1,953.63 मीटर भारत का सबसे लंबा वर्टिकल शाफ्ट: 474.30 मीटर अंतिम ब्रेकथ्रू की तारीख: 9 जून 2026 सुरंग की शुरुआत: 2028

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माइनस 30 डिग्री तापमान और मुश्किल चुनौतियां

माइनस 30 डिग्री तापमान और मुश्किल चुनौतियां 7 / 7

पश्चिमी हिमालय के इस हिस्से में सुरंग बनाना बेहद मुश्किल काम था. इसे बनाने के दौरान इंजीनियरों को -20°C से -30°C तक के हाड़ कंपाने वाले तापमान, हिमस्खलन के खतरे और हिमालय की नाजुक और बदलती चट्टानी संरचना जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एजेंसी ने बिना किसी दुर्घटना के इस काम को पूरा किया है. इस परियोजना में 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' (NATM) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो नाजुक पहाड़ों में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने में बेहद कारगर रही है. ये मुख्य सुरंग पश्चिमी पोर्टल में कश्मीर के बालटाल से शुरू होकर लद्दाख के मीनामार्ग पर खत्म होती है, जिसकी चौड़ाई 9.5 मीटर और ऊंचाई 7.57 मीटर है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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