दुनिया के 10 सबसे घातक वायरस, एक से 100 प्रतिशत जाएगी जान, जानें सूची में किस-किस का नाम?

दुनिया का सबसे घातक वायरस से हर साल करीब 59000 लोगों की मौत होती है। ऐसे की कुछ खतरनाक वायरल को मृत्यु दर के हिसाब से रैंक देकर टॉप-10 वायरल की सूची तैयार की गई है। आइए जानते हैं कि दुनिया के 10 सबसे घातक वायरस कौन-से हैं?

deadliest virus
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रेबीज वायरस

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रेबीज वायरस ज्यादातर कुत्तों के काटने पर उसके स्लाइवा से फैलता है। एक बार लक्षण विकसित हो जाने पर रेबीज की मृत्यु दर लगभग 100% होती है, हालांकि प्रारंभिक उपचार करके संक्रमण को पूरे शरीर में फैलने से काफी हद तक रोका जा सकता है। इस वायरस से हर साल 59000 लोगों की मौत होती है। यह वायरल अफ्रीका और साउथ एशिया के देशों में फैलता है।

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हर्पीस बी और लूजो वायरस

हर्पीस बी और लूजो वायरस3 / 6

नंबर-2 बी वायरस (हर्पीस बी) बंदरों से इंसानों में फैलता है और एशियाई देशों में इसका संक्रमण सबसे ज्यादा फैलता है। इस संक्रमण से हर साल 21 मौत होती हैं और इससे मृत्यु दर का प्रतिशत 80 है। नंबर-3 लुजो वायरस दक्षिण पूर्व अफ्रीका के देशों में चूहों के जरिए फैलता है और इससे मृत्यु दर 80% है। इस वायरस से हर साल 4 लोगों की मौत होती है। दुनिया में सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका के देश जांबिया में साल 2008 में इसका मरीज मिला था।

निपाह और हेंड्रा वायरस

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नंबर-4 निपाह वायरस से मौत होने की संभावना 40–75% प्रतिशत है। इस वायरस से साल में करीब 600 मौतें होती हैं। यह वायरल चमगादड़ों से फैलता है और इसका सबसे पहला मरीज 1998 में मलेशिया में मिला था। दक्षिण एशिया के देशों में यह वायरस सबसे ज्यादा फैलता है। नंबर-5 हेंड्रा वायरस से मौत होने की संभावना 57% है और इससे साल में 4 मौतें होती हैं। यह वायरस ऑस्ट्रेलिया में घोड़ों में फैलता है। 1994 में इस वायरस का सबसे पहला मरीज मिला था। तब ऑस्ट्रेलिया में 13 घोड़ों और एक ट्रेनर की मौत हुई थी।

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इबोला और मरबर्ग वायरस

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नंबर-6 इबोला वायरस से मौत होने की संभावना 50% है। इससे हर साल 15000 से ज्यादा मौतें होती हैं। यह वायरस बंदरों से फैलता है। मध्य और पश्चिम एशिया में इसके मरीज सबसे ज्यादा मिलते हैं। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कोंगो की नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया। नंबर-7 मारबर्ग वायरस चमगादड़ों से फैलता है और इससे मौत होने की संभावना 50% है। इससे एक साल में 470 से ज्यादा मौतें होती हैं। यह वायरस सहारा अफ्रीका के देशों में फैलता है। इस वायरस को इबोला वायरस का रिश्तेदार माना जाता है।

बर्ड फ्लू और हेमोरेजिक फीवर वायरस

बर्ड फ्लू और हेमोरेजिक फीवर वायरस6 / 6

नंबर-8 एच5एन1 (एवियन इन्फ्लुएंजा) को बर्ड फ्लू वायरस भी कहते हैं, जो मुर्गियों से फैलता है। इससे मौत होने की संभावना 50% है और इससे साल में 477 मौतें होती हैं। भारत समेत पूरी दुनिया में यह वायरस फैला हुआ है। नंबर-9 क्रीमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF) वारयस खून चूसने वाले मकड़ी जैसे जीवों के कारण फैलता है। इससे मौत होने की संभावना 10–40% है। इससे हर साल 1000 से 2000 लोगों की मौत होती है। यूरेशिया और अफ्रीका के देशों में यह वायरस फैलता है। नंबर 10 MERS-कोव ऊंटों से फैलता है और इससे मौत होने की संभावना 36% है। साल में कुल 959 मौतें इसके कारण होती हैं। मध्य पूर्व के देशों में यह वायरस फैलता है। इसका सबसे पहला मरीज 2012 में सऊदी अरब में मिला था।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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