Bawasir Ke Karan: बवासीर एक ऐसी दिक्कत है जिसमें व्यक्ति को मलत्याग करते हुए खून निकलने की दिक्कत होती है. अगर हेमोरॉइड्स ज्यादा बढ़ जाएं तो बवासीर को पूरी तरह ठीक करने के लिए सर्जरी करवाना जरूरी हो जाता है. वहीं, फिशर्स (Fissures) में मलद्वार (Anal) में कट्स लग जाते हैं जिस चलते व्यक्ति का मलत्याग करना मुश्किल होने लगता है और मलत्याग के दौरान असहनीय दर्द होता है सो अलग. ऐसे में यहां जानिए वो कौन सी गलतियां हैं जो बवासीर (Piles) और फिशर्स के खतरे को बढ़ा सकती हैं.
लंबे समय तक बैठना

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अगर आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं तो इससे फिजिकल एक्टिविटी कम होती है, बाउस मूवमेंट्स स्लो होने लगते हैं और एनोरेक्टल रीजन पर दबाव पड़ने लगता है जिससे बवासीर और फिशर्स होने का खतरा बढ़ जाता है.
टॉयलेट में मोबाइल चलाना

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बहुत से लोग वेस्टर्न टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं और मलत्याग करने के दौरान फोन चलाते हैं. फोन चलाने पर व्यक्ति टॉयलेट सीट पर जरूरत से ज्यादा बैठा रह जाता है जिससे मलाश्य की नसों पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है और हेमोरॉइड्स होने की संभावना ज्यादा होती है.
गलत टॉयलेट पॉजीशन

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अगर टॉयलेट में सही पॉजीशन में ना बैठा जाए तो इससे एनल से जुड़ी दिक्कतें बढ़ती हैं. इसीलिए स्क्वैटिंग पॉजीशन में बैठना चाहिए या वेस्टर्न टॉयलेट में स्टूल को पैरों के नीचे रखकर मलत्याग करना चाहिए.
फाइबर की कमी

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खानपान में प्रोटीन ज्यादा हो और फाइबर और पानी कम हो तो इससे कब्ज हो सकती है. लंबे समय तक कब्ज होने पर और स्टूल के हार्ड हो जाने पर फिशर्स या बवासीर हो सकता है.
शुरुआती लक्षणों को इग्नोर करना

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व्यक्ति को अगर मलत्याग से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं तो वह शुरुआत में इन दिक्कतों को इग्नोर करने लगता है. मलत्याग करते हुए खून निकलना, खुजली होना, एनस के पास दाना निकलना या फिर लगातार कब्ज बने रहना कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए.
समय रहते इलाज है जरूरी

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एनोरेक्टल हेल्थ का ख्याल रखना जरूरी है. अगर आपका लाइफस्टाइल और खानपान सही नहीं होगा तो ये दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसे में अपनी जीवनशैली को सुधारें और अगर मलद्वार के आस-पास किसी भी तरह की दिक्कत महसूस होती है तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी ना करें.
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