ये 5 गलतियां बढ़ा देती हैं बवासीर, फिशर्स और एनोरेक्टल बीमारियों का खतरा, कहीं आप भी तो नहीं करते यही काम

Piles And Fissures Causes: व्यक्ति की रोजमर्रा की कुछ आदतें बवासीर या फिशर्स की वजह बन सकती हैं. ऐसे में यहां जानिए वो कौन सी गलतियां हैं जिनसे बचना बेहद जरूरी है.

Piles And Fissures
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Piles And Fissures

Bawasir Ke Karan: बवासीर एक ऐसी दिक्कत है जिसमें व्यक्ति को मलत्याग करते हुए खून निकलने की दिक्कत होती है. अगर हेमोरॉइड्स ज्यादा बढ़ जाएं तो बवासीर को पूरी तरह ठीक करने के लिए सर्जरी करवाना जरूरी हो जाता है. वहीं, फिशर्स (Fissures) में मलद्वार (Anal) में कट्स लग जाते हैं जिस चलते व्यक्ति का मलत्याग करना मुश्किल होने लगता है और मलत्याग के दौरान असहनीय दर्द होता है सो अलग. ऐसे में यहां जानिए वो कौन सी गलतियां हैं जो बवासीर (Piles) और फिशर्स के खतरे को बढ़ा सकती हैं.

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लंबे समय तक बैठना

लंबे समय तक बैठना 2 / 7

अगर आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं तो इससे फिजिकल एक्टिविटी कम होती है, बाउस मूवमेंट्स स्लो होने लगते हैं और एनोरेक्टल रीजन पर दबाव पड़ने लगता है जिससे बवासीर और फिशर्स होने का खतरा बढ़ जाता है.

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टॉयलेट में मोबाइल चलाना

टॉयलेट में मोबाइल चलाना 3 / 7

बहुत से लोग वेस्टर्न टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं और मलत्याग करने के दौरान फोन चलाते हैं. फोन चलाने पर व्यक्ति टॉयलेट सीट पर जरूरत से ज्यादा बैठा रह जाता है जिससे मलाश्य की नसों पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है और हेमोरॉइड्स होने की संभावना ज्यादा होती है.

गलत टॉयलेट पॉजीशन

गलत टॉयलेट पॉजीशन 4 / 7

अगर टॉयलेट में सही पॉजीशन में ना बैठा जाए तो इससे एनल से जुड़ी दिक्कतें बढ़ती हैं. इसीलिए स्क्वैटिंग पॉजीशन में बैठना चाहिए या वेस्टर्न टॉयलेट में स्टूल को पैरों के नीचे रखकर मलत्याग करना चाहिए.

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फाइबर की कमी

फाइबर की कमी 5 / 7

खानपान में प्रोटीन ज्यादा हो और फाइबर और पानी कम हो तो इससे कब्ज हो सकती है. लंबे समय तक कब्ज होने पर और स्टूल के हार्ड हो जाने पर फिशर्स या बवासीर हो सकता है.

शुरुआती लक्षणों को इग्नोर करना

शुरुआती लक्षणों को इग्नोर करना 6 / 7

व्यक्ति को अगर मलत्याग से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं तो वह शुरुआत में इन दिक्कतों को इग्नोर करने लगता है. मलत्याग करते हुए खून निकलना, खुजली होना, एनस के पास दाना निकलना या फिर लगातार कब्ज बने रहना कुछ ऐसे लक्षण हैं जिन्हें कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए.

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समय रहते इलाज है जरूरी

समय रहते इलाज है जरूरी 7 / 7

एनोरेक्टल हेल्थ का ख्याल रखना जरूरी है. अगर आपका लाइफस्टाइल और खानपान सही नहीं होगा तो ये दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसे में अपनी जीवनशैली को सुधारें और अगर मलद्वार के आस-पास किसी भी तरह की दिक्कत महसूस होती है तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी ना करें. यह भी पढ़ें - पुरुषों में किडनी की पथरी होने पर दिखते हैं ये लक्षण, यूरोलॉजिस्ट ने कहा कभी ना करें इग्नोर अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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