देशभर में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के बीच ये जानना बेहद जरूरी है कि इंसानी शरीर कितनी गर्मी सह सकता है. 45 डिग्री से ऊपर तापमान पहुंचने पर शरीर के कूलिंग सिस्टम पर असर पड़ने लगता है, जबकि 50 से 60 डिग्री तापमान त्वचा को कुछ सेकेंड में जला सकता है.
शरीर का नॉर्मल तापमान कितना होता है?

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इंसानी शरीर का नॉर्मल अंदरूनी तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस माना जाता है. शरीर पसीने और ब्लड सर्कुलेशन के जरिए खुद को ठंडा रखने की कोशिश करता है. यही प्रोसेस शरीर को नॉर्मल काम करने में मदद करती है.
कब फेल होने लगता है शरीर का कूलिंग सिस्टम?

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जब बाहरी तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच जाता है, तब शरीर को खुद को ठंडा रखना मुश्किल होने लगता है. लगातार गर्मी में रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, जो जानलेवा भी हो सकता है.
कितनी गर्मी तक सुरक्षित रहती है त्वचा?

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, इंसानी त्वचा लगभग 48 डिग्री सेल्सियस तक की सूखी गर्मी कुछ समय के लिए सह सकती है. लेकिन तापमान बढ़ने पर स्किन सेल्स पर असर पड़ने लगता है और जलन महसूस होती है.
50 डिग्री पर कितनी जल्दी जलती है स्किन?

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अगर त्वचा 50 डिग्री सेल्सियस गर्म सतह या पानी के संपर्क में आती है, तो करीब 5 मिनट में गंभीर बर्न हो सकता है. तापमान जितना बढ़ता है, त्वचा के जलने का समय उतना कम हो जाता है. 55 डिग्री सेल्सियस पर सिर्फ 10 सेकेंड में त्वचा झुलस सकती है. वहीं 60 डिग्री तापमान पर सिर्फ 1 सेकेंड का संपर्क भी गंभीर थर्ड डिग्री बर्न का कारण बन सकता है. यही वजह है कि तेज गर्म सतहों और उबलते पानी से बचने की सलाह दी जाती है.
गीली गर्मी ज्यादा खतरनाक क्यों?

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भाप, गर्म पानी या नमी वाली गर्मी त्वचा को ज्यादा तेजी से नुकसान पहुंचाती है. नमी की वजह से गर्मी सीधे त्वचा के अंदर पहुंचती है और कम समय में गंभीर जलन पैदा कर सकती है. वहीं, बहुत ज्यादा पसीना आना, चक्कर, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी और शरीर का तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाना हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत ठंडी जगह पर जाना और मेडिकल मदद लेना जरूरी है.
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