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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर दिल से जुड़ी छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन कई बार शरीर गंभीर बीमारियों से पहले हल्के संकेत देने लगता है. अगर इन संकेतों को समय रहते समझ लिया जाए, तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है.
चुपचाप बढ़ती है दिल की नसों की समस्या

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कुछ सालों से लोगों के बीच जिल की नसों में ब्लॉकेज की समस्या के मामले तेजी से देखने को मिले हैं. दिल की नसों में ब्लॉकेज अचानक नहीं बनती बल्कि यह धीरे-धीरे विकसित होने वाली समस्या है. मेडिकल भाषा में इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है. इसमें नसों की अंदरूनी दीवारों पर फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है.
कोरोनरी आर्टरी डिजीज क्यों होती है खतरनाक

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दिल की सबसे आम बीमारियों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज शामिल है. इस स्थिति में दिल तक खून, ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने वाली नसें संकरी हो जाती हैं. इससे दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और जोखिम बढ़ जाता है.
नसों में प्लाक बनने की असली वजह क्या है

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विशेषज्ञों के अनुसार नसों में बनने वाला प्लाक कोलेस्ट्रॉल, फैट, कैल्शियम और अन्य अपशिष्ट पदार्थों से मिलकर बनता है. यह धीरे-धीरे जमा होकर नसों को सख्त कर देता है. इससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है और दिल पर दबाव बढ़ने लगता है.
ये आदतें बढ़ा सकती हैं ब्लॉकेज का खतरा

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खराब खानपान, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी ब्लॉकेज के बड़े कारण माने जाते हैं. इसके अलावा खराब कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और अच्छे कोलेस्ट्रॉल का कम होना भी दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाता है.
शरीर देता है ये शुरुआती संकेत

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दिल की नसों में समस्या होने पर सीने में दर्द या दबाव, हल्के काम में सांस फूलना, अचानक थकान, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे संकेत दिख सकते हैं. कई बार दर्द कंधे, हाथ या जबड़े तक भी फैल सकता है.
गंभीर स्थिति में दिख सकते हैं अलग संकेत

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जब ब्लॉकेज ज्यादा बढ़ जाती है, तो शरीर के अलग हिस्सों में अलग असर दिख सकता है. जैसे दिमाग में ब्लड फ्लो कम होने से सुन्नपन, पैरों में दर्द, ज्यादा पसीना या चलने में परेशानी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं.
कैसे करें बचाव और कब कराएं जांच

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दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तनाव से दूरी और समय-समय पर हेल्थ चेकअप जरूरी है. डॉक्टर जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, ईसीजी, इको, स्ट्रेस टेस्ट या एंजियोग्राफी जैसी जांचों की सलाह देते हैं ताकि सही स्थिति पता चल सके.
अस्वीकरण

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इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है. (Image: Pexels)