
1 / 6
नवजात शिशु की आंखों का पहला चेकअप जन्म के तुरंत बाद ही कर लिया जाता है ताकि किसी जन्मजात बीमारी का पता चले. इसके बाद 6 महीने से 1 साल की उम्र के बीच बच्चों की आंखों की बेसिक जांच जरूर करानी चाहिए.
क्यों है 3 से 5 साल की उम्र खास?

2 / 6
डॉक्टरों के मुताबिक 3 से 5 साल की उम्र विजन डेवलपमेंट के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. इस दौरान नियमित टेस्ट कराने से नजर की कमजोरी या भेंगापन जैसी समस्याओं को समय रहते ठीक किया जा सकता.
कमजोरी के मुख्य लक्षण क्या हैं?

3 / 6
अगर आपका बच्चा बार-बार आंखें मलता है या टीवी बहुत करीब से देखता है तो यह कमजोर नजर का संकेत है. सिरदर्द की शिकायत करना या पढ़ाई में ध्यान न लगा पाना भी आंखों की समस्या की निशानी हो सकती है.
चेकअप में देरी का क्या होगा अंजाम?

4 / 6
समय पर जांच न कराने से बच्चों में मायोपिया या एंब्लायोपिया जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है. शुरुआत में इनका इलाज आसान होता है लेकिन देरी होने पर यह समस्याएं स्थायी रूप धारण कर सकती हैं.
स्क्रीन टाइम का क्या पड़ता है असर?

5 / 6
आजकल मोबाइल और टीवी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से छोटी उम्र में ही बच्चों को चश्मा लग रहा है. स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आंखों पर बुरा असर डालती है जिससे बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है.
बेहतर भविष्य के लिए क्या करें?

6 / 6
5 साल की उम्र के बाद हर 1 से 2 साल में बच्चों की आंखों का नियमित चेकअप कराना बेहद जरूरी है. अच्छी दृष्टि न केवल बच्चे की पढ़ाई में मदद करती है बल्कि उसके सर्वांगीण विकास के लिए भी आवश्यक है.