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प्राचीन समय में सात दिन का हफ्ता रोमन साम्राज्य से शुरू हुआ. वहां सूर्य की पूजा होती थी और रविवार को खास महत्व मिला. भारत में ब्रिटिश राज के समय ईसाई अधिकारी और सैनिक रविवार को चर्च जाते थे. उन्होंने अपने रिवाज से सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में यह छुट्टी शुरू की. जो बाद में आराम का दिन बन गया. रविवार की छुट्टी सिर्फ आराम नहीं, बल्कि रोमन कानून, ईसाई प्रभाव, ब्रिटिश राज और भारतीय मजदूर आंदोलन का मिला-जुला रूप है. इस दिन लोग परिवार के साथ समय बिताते हैं और अगले हफ्ते के लिए तैयार होते हैं. आइए जानते हैं संडे के पीछे छुट्टी वाला दिन होने की वजहें.
321 ईस्वी में रोमन सम्राट ने कानून बनाया

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321 ईस्वी में रोमन सम्राट कांस्टेंटाइन ने कानून बनाया कि रविवार को शहर के जज, लोग और कारीगर काम न करें. इसे 'सूर्य का पवित्र दिन' कहा गया. गांव वाले खेती कर सकते थे, लेकिन यह पहला सरकारी आराम का दिन था.
लंबे काम से बचाने के लिए रविवार को छुट्टी

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sabbath sentinel के मुताबिक, बाद में यूरोप में ईसाई प्रभाव बढ़ा. ब्रिटेन जैसे देशों में औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों को लंबे काम से बचाने के लिए रविवार को छुट्टी दी जाने लगी. इससे उत्पादन भी बढ़ा और लोग स्वस्थ रहे.
यीशु मसीह का पुनरुत्थान रविवार को

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ईसाई धर्म में यीशु मसीह का पुनरुत्थान रविवार को माना जाता है, इसलिए इसे प्रभु का दिन कहा जाता है. यहूदी परंपरा में शनिवार को विश्राम था, लेकिन ईसाइयों ने इसे रविवार पर शिफ्ट कर दिया ताकि नया विश्वास मजबूत हो.
1890 में मेघाजी लोखंडे ने इतिहास रचा

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1890 में बॉम्बे की मिलों के मजदूर नेता नारायण मेघाजी लोखंडे ने इतिहास रचा. उन्होंने फैक्ट्री कमीशन को आवेदन दिया और 10 हजार मजदूरों के साथ संघर्ष किया. रविवार खंडोबा देव का दिन भी है, जो कई कामगार पूजते हैं. आखिरकार रविवार छुट्टी मंजूर की