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आज इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह हमारे फोन तक पहुंचता कैसे है? ज्यादातर लोग मानते हैं कि इंटरनेट सैटेलाइट से आता होगा, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. इसके पीछे समंदर के नीचे बिछा एक विशाल नेटवर्क काम करता है, जो पूरी दुनिया को जोड़ता है.
भारत में इंटरनेट की शुरुआत कब हुई?

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भारत में आम लोगों के लिए इंटरनेट की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी. इस सेवा को शुरू करने की जिम्मेदारी विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) ने निभाई थी.
आम लोगों से पहले कहां इस्तेमाल होता था इंटरनेट

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इंटरनेट आम जनता तक पहुंचने से पहले सिर्फ एजुकेशन और रिसर्च के कामों के लिए इस्तेमाल होता था. उस समय यह सुविधा कुछ खास संस्थानों तक ही सीमित थी.
इंटरनेट सैटेलाइट से नहीं, केबल से आता है

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अक्सर लोग सोचते हैं कि इंटरनेट हवा या सैटेलाइट के जरिए आता है, लेकिन असल में यह समंदर के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों से चलता है. यही केबल पूरी दुनिया को जोड़ती हैं.
कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टम

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जब आप फोन पर कुछ सर्च करते हैं, तो आपका डेटा इन केबलों के जरिए विदेशों में मौजूद सर्वरों तक जाता है और वहां से जानकारी लेकर कुछ ही सेकंड में वापस आपके पास आ जाता है.
17 केबलों से भारत में आती है इंटरनेट कनेक्टिविटी

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भारत में इंटरनेट मुख्य रूप से 17 इंटरनेशनल सबमरीन केबलों के जरिए आता है. ये केबल समुद्र से निकलकर देश के अलग-अलग तटीय इलाकों में पहुंचती हैं.
कहां हैं केबल लैंडिंग स्टेशन

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जहां ये केबल जमीन से जुड़ती हैं, उन्हें केबल लैंडिंग स्टेशन कहा जाता है. भारत में ये स्टेशन मुंबई, चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम जैसे शहरों में मौजूद हैं.
सबसे ज्यादा ट्रैफिक कौन संभालता है

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देश में इंटरनेट ट्रैफिक को संभालने में मुंबई और चेन्नई की सबसे बड़ी भूमिका है. यही दो शहर देश के ज्यादातर डेटा का लोड संभालते हैं.
दुनिया से ऐसे जुड़ा है भारत

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भारत को एशिया और यूरोप से जोड़ने के लिए SEA-ME-WE-4, SEA-ME-WE-5, I-ME-WE और Falcon जैसे बड़े केबल नेटवर्क इस्तेमाल होते हैं. ये हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देते हैं.
भारत में कितने लोग इस्तेमाल करते हैं इंटरनेट

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2025 तक भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या करीब 95 करोड़ पहुंच चुकी है. इनमें सबसे ज्यादा यूजर्स उत्तर प्रदेश से हैं, जहां करीब 13 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं.