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Emergency Alert System Test: केंद्र सरकार के 'सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम' की सबसे बड़ी सबसे बड़ी खासियत है कि यह कमजोर नेटवर्क में भी काम कर सकता है. यानी जहां कॉल ड्रॉप हो रही हो, इंटरनेट न चल रहा हो, वहां भी अलर्ट आने की संभावना रहेगी, क्योंकि यह SMS की तरह कतार में नहीं फंसता, बल्कि सीधे टावर से पुश होता है. लेकिन इसकी भी अपनी सीमाएं हैं. जानें, कहां-कहां काम नहीं करेगा यह इमरजेंसी मैसेज सिस्टम?
कहां-कहां काम नहीं करेगा सिस्टम?

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अगर आपके फोन में बिल्कुल भी सिग्नल नहीं है तो यह काम नहीं करेगा. फोन बंद होने की स्थिति में अलर्ट नहीं मिलेगा. यदि फोन नेटवर्क से पूरी तरह कटा है, तो आप चेतावनी से वंचित रह सकते हैं. कुछ पुराने फीचर फोन या स्मार्टफोन जो इस तकनीक को सपोर्ट नहीं करते, उन पर यह मैसेज नहीं आएगा. यदि यूजर ने फोन की सेटिंग्स में जाकर 'इमरजेंसी अलर्ट' को मैनुअली डिसेबल (बंद) कर रखा है, तो भी मैसेज नहीं पहुंचेगा.
आपदा के समय ज्यादा कारगर कम्युनिकेशन टूल

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आने वाले समय में यह सर्विस आम लोगों के लिए नियमित तौर पर इस्तेमाल में लाई जाएगी. यानी आगे जब भी कोई बड़ी आपदा जैसे भूकंप, बाढ़, साइकलोन या कोई सिक्योरिटी थ्रेट का खतरा होगा, तो सरकार सीधे आपके फोन पर तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट भेज सकेगी. यही वजह है कि इसे आपदा के समय ज्यादा कारगर कम्युनिकेशन टूल माना जा रहा है.
बिना इंटरनेट और ऐप के मिलेगा अलर्ट

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इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए आपको न तो इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत है और न ही किसी खास ऐप की. यह तकनीक सीधे मोबाइल टावर के जरिए एक साथ पूरे इलाके में ब्रॉडकास्ट की जाती है. यह साधारण SMS की तरह नहीं है जो नेटवर्क जाम होने पर कतार में फंस जाए; यह सीधे टावर से पुश होता है, जिससे यह कमजोर नेटवर्क या कॉल ड्रॉप जैसी स्थिति में भी काम करता है.
बिना सिम के भी बजेगी चेतावनी?

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हैरान करने वाली बात यह है कि यह सिस्टम मोबाइल नंबर पर नहीं, बल्कि लोकेशन पर आधारित है. इसका मतलब है कि यदि आपका फोन ऑन है और किसी भी नेटवर्क के सिग्नल की रेंज में है, तो बिना सिम कार्ड के भी आपके फोन पर यह इमरजेंसी अलर्ट फ्लैश हो सकता है. इसे आप अपने इलाके का 'डिजिटल लाउडस्पीकर' समझ सकते हैं.