
1 / 8
EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन एक ऐसी डिवाइस है, जिसके जरिए वोटिंग पूरी तरह डिजिटल तरीके से होती है. यह बैटरी से चलने वाली मशीन है, जो मतदान के दौरान डाले गए हर वोट को सुरक्षित तरीके से रिकॉर्ड करती है और बाद में इन्हीं वोटों की गिनती भी करती है. आज के समय में भारत की चुनाव प्रक्रिया में EVM सबसे अहम भूमिका निभा रही है, खासकर जब नजरें 4 मई को आने वाले बंगाल चुनाव के नतीजों पर टिकी हैं.
एक EVM में कितने उम्मीदवार और वोट?

2 / 8
EVM की क्षमता भी काफी खास होती है. एक मशीन में अधिकतम 64 उम्मीदवारों के नाम दर्ज किए जा सकते हैं. वहीं वोट रिकॉर्ड करने की बात करें तो एक EVM में कुल 3840 वोट तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं, जिससे बड़े स्तर पर भी चुनाव कराना आसान हो जाता है.
पहली बार कब हुआ EVM का इस्तेमाल?

3 / 8
भारत में EVM का पहला इस्तेमाल साल 1982 में हुआ था. केरल के परूर (Paravur) विधानसभा क्षेत्र के करीब 50 मतदान केंद्रों पर इन मशीनों के जरिए वोटिंग कराई गई थी. यह प्रयोग सफल रहा और इसके बाद धीरे-धीरे EVM का उपयोग बढ़ने लगा.
धीरे-धीरे बढ़ा EVM का इस्तेमाल

4 / 8
शुरुआती सफलता के बाद 1998-99 में देश के कुछ राज्यों की विधानसभा सीटों पर EVM से मतदान कराया गया. इसके बाद 2003 में सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और उपचुनाव EVM के जरिए कराए गए, जिससे यह तकनीक पूरे देश में लागू हो गई.
2004 में हुआ बड़ा बदलाव

5 / 8
EVM के इस्तेमाल को लेकर सबसे बड़ा फैसला साल 2004 में लिया गया, जब लोकसभा चुनाव पूरी तरह EVM के जरिए कराए गए. यह भारत के चुनाव इतिहास में एक बड़ा बदलाव था, जिसने वोटिंग प्रक्रिया को तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया.
EVM कौन बनाता है?

6 / 8
भारत में इस्तेमाल होने वाली EVM मशीनें किसी प्राइवेट कंपनी नहीं, बल्कि सरकारी संस्थाओं द्वारा बनाई जाती हैं. इन्हें मुख्य रूप से Bharat Electronics Limited (बेंगलुरु) और Electronics Corporation of India Limited (हैदराबाद) तैयार करती हैं. ये दोनों पब्लिक सेक्टर कंपनियां भारत निर्वाचन आयोग के तकनीकी दिशा-निर्देशों के तहत EVM और VVPAT मशीनों का निर्माण करती हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता बनी रहती है.
EVM की कीमत कितनी होती है?

7 / 8
शुरुआती दौर में EVM मशीनें काफी सस्ती हुआ करती थीं. साल 1990 में जब इन्हें पहली बार खरीदा गया, तब एक मशीन की कीमत करीब 5,500 रुपये थी. समय के साथ तकनीक में सुधार और फीचर्स बढ़ने के कारण इसकी लागत भी बढ़ी. साल 2014 में जब नए EVM का ऑर्डर दिया गया, तो एक मशीन की कीमत लगभग 10,500 रुपये तय की गई थी.
बंगाल चुनाव और EVM की भूमिका

8 / 8
हाल ही में हुए बंगाल चुनाव में भी EVM का ही इस्तेमाल किया गया है और 4 मई को आने वाले नतीजे इन्हीं मशीनों के जरिए सामने आएंगे. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि EVM कैसे काम करती है और क्यों यह आज भारत की चुनाव प्रणाली का भरोसेमंद हिस्सा बन चुकी है.