Humraaz Actress Vimi Tragic Story: बॉलीवुड में कुछ ऐसी कहानियां हैं, जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे. ऐसी ही कहानी इस हसीना की है, जो रातों-रात हीरोइन बन गई. लेकिन 34 साल में मरने पर उनकी अंतिम यात्रा ठेले पर निकाली गई.
रातों रात बनीं स्टार

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बी आर चोपड़ा की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'हमराज' (1967) में रातों रात स्टार बनीं विमी की पर्सनल लाइफ काफी दर्द भरी है. उन्होंने जितनी जल्दी शौहरत पाई, उतना दुख भी सहा है.
एक्ट्रेस विमी का डेब्यू

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विमी ने साल 1067 में आई सुपरहिट फिल्म हमराज से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की. इस फिल्म में वह महान अभिनेता राजकुमार (Raaj Kumar) और सुनील दत्त (Sunil Dutt) जैसे स्थापित दिग्गजों के साथ मुख्य भूमिका में नजर आई थीं.
भारी भरकम फीस चार्ज करती हैं

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पहली फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद वे इंडस्ट्री की सबसे डिमांडिंग एक्ट्रेसेस में शामिल हो गईं. 60 के दशक में वह एक फिल्म के लिए करीब 3 लाख रुपये चार्ज करती थीं, जो उस दौर के हिसाब से बहुत बड़ी रकम थी.
वीमी की फिल्में

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वीमी की फिल्में उन्होंने 'आबरू' (1968), 'पतंगा' (1971), और 'वचन' (1974) जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया. लेकिन उन्होंने 1967 में आई सुपरहिट फिल्म 'हमराज' से वे बहुत पॉपुलर हुईं.
पति से मिला धोखा

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फिल्मों में आने से पहले ही वह शादीशुदा थीं और दो बच्चों की मां थीं. उनके पति शिव अग्रवाल (एक बड़े उद्योगपति के बेटे) ने शुरुआत में उन्हें सपोर्ट किया, लेकिन बाद में दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा. विमी को घरेलू हिंसा (Physical Abuse) का सामना करना पड़ा और अंततः दोनों का तलाक हो गया.
बिजनेस में मिली असफलता

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विमी ने कोलकाता (कलकत्ता) जाकर एक टेक्सटाइल बिजनेस शुरू कर खुद को संभालने की कोशिश की थी, लेकिन वह भी बुरी तरह फ्लॉप हो गया और वह पूरी तरह दिवालिया (Bankrupt) हो गईं.
लिवर की बीमारी से हुई मौत

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इस घटना से वे अंदर से पूरी तरह टूट गई थीं. अत्यधिक शराब के सेवन और मानसिक तनाव के कारण उनका लिवर पूरी तरह खराब हो गया. 22 अगस्त 1977 को मुंबई के नानावती अस्पताल के एक सामान्य वार्ड (General Ward) में बेहद तंगहाली और अकेलेपन में उन्होंने दम तोड़ दिया.
लावारिस जैसी अंतिम यात्रा

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मौत के वक्त उनके पास कफन या अंतिम संस्कार तक के पैसे नहीं बचे थे. जिस अभिनेत्री के घर के बाहर कभी महंगी कारों की कतारें लगती थीं, उसकी लाश को सांताक्रूज श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए एक हाथगाड़ी (ठेले) का सहारा लेना पड़ा. फिल्म इंडस्ट्री से केवल सुनील दत्त ही उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले एकमात्र जाने-माने व्यक्ति थे.