भारत में पहलवानी का इतिहास काफी पुराना है. आल्हा-ऊदल, गामा पहलवान हों या दारा सिंह, भारत के कई वीर सपूत पहलवानों ने दुनियाभर में देश का नाम रोशन किया है. पहलवानी भारत की संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है, मल्लयुद्ध हमारी परंपरा रही है.
पहलवानों का गांव

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आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने पहलवानों का गांव कहा जाता है. इस गांव को भारत का सबसे ताकतवर गांव भी कहा जाता है, क्योंकि यहां हर घर में आपको एक पहलवान मिल जाएगा.
भारत का सबसे ताकतवर गांव

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दक्षिण दिल्ली के असोला-फतेहपुर बेरी गांव को आजकल पूरे देश में 'भारत का सबसे ताकतवर गांव’ के नाम से जाना जा रहा है. यहां फिटनेस कोई फैशन या शौक नहीं, बल्कि जीवनशैली का अभिन्न अंग बन चुकी है. जिम को मंदिर मानने वाले इस गांव के युवा सुबह-शाम कड़ी मेहनत करते हैं और हर घर से पहलवान या मजबूत कद-काठी वाले युवक निकलते हैं.
जिम को मंदिर की तरह पूजते हैं लोग

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असोला-फतेहपुर बेरी गांव में जिम को लोग मंदिर की तरह पूजते हैं. यहां के युवा रोजाना घंटों तक व्यायाम करते हैं और पारंपरिक अखाड़े में मिट्टी की कुश्ती भी खेलते हैं. मोटरसाइकिल उठाना, ट्रैक्टर खींचना और एक-दूसरे को कंधे पर उठाकर ट्रेनिंग करना यहां की आम बात है.
फिटनेस और अनुशासन की शिक्षा

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इस गांव में बच्चों को बचपन से ही फिटनेस और अनुशासन की शिक्षा दी जाती है. परिवार मोबाइल और टीवी की बजाय उन्हें अखाड़े भेजना पसंद करते हैं. बुजुर्गों का मानना है कि सच्ची ताकत मेहनत और अनुशासन से ही आती है.
अनुशासित खानपान

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गांव के युवाओं का खानपान बेहद अनुशासित है. वे मुख्य रूप से शाकाहारी भोजन करते हैं और इसमें दूध, दही, घी, सूखे मेवे तथा प्रोटीन युक्त चीजों को प्राथमिकता देते हैं. शराब और धूम्रपान जैसी आदतों से वे पूरी तरह दूर रहते हैं.
'बाउंसरों की फैक्ट्री'

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असोला-फतेहपुर बेरी को ‘बाउंसरों की फैक्ट्री’ भी कहा जाता है. यहां के ज्यादातर युवा दिल्ली-एनसीआर के नाइट क्लब, होटल, बार और बड़े आयोजनों में बाउंसर व बॉडीगार्ड के रूप में काम करते हैं. उनकी शारीरिक ताकत और अनुशासन की वजह से इनकी मांग लगातार बढ़ रही है.
1995 में हुई परंपरा की शुरुआत

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इस परंपरा की शुरुआत 1995 में विजय तंवर नामक पहलवान से हुई थी. उन्होंने सबसे पहले बाउंसर का काम शुरू किया, जिसके बाद गांव के अन्य युवा भी इस क्षेत्र में आए. आज पूरे गांव में हर दूसरे घर से कम से कम एक युवक सुरक्षा से जुड़े पेशे में कार्यरत है.