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रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ने लगा है क्योंकि प्याज (Onion) की कीमतों ने अचानक 'छलांग' मार दी है। मंडियों में आवक कम होने और निर्यात नीति में बदलाव की सुगबुगाहट ने आम आदमी की आंखों में आंसू ला दिए हैं।
क्यों अचानक लाल हुई प्याज?

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कुछ दिन पहले तक सस्ते दामों पर मिल रही प्याज अब ₹50-₹60 प्रति किलो के पार पहुंचने लगी है। आखिर क्या वजह है कि अचानक मंडियों में प्याज की कीमतें दोगुनी होने लगी हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे के 5 बड़े कारण।
बेमौसम बारिश की मार: रबी की फसल को पहुंचा भारी नुकसान

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महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में बेमौसम हुई बारिश और ओलावृष्टि ने प्याज की तैयार फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। खराब मौसम के कारण खेतों में ही प्याज सड़ने लगी, जिससे मंडियों तक पहुंचने वाली सप्लाई आधी रह गई है।
पुरानी प्याज का खत्म होता स्टॉक: नई फसल आने में अभी है वक्त

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कोल्ड स्टोरेज में रखी पुरानी प्याज (रबी स्टॉक) अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। नई 'खरीफ' फसल के आने में अभी कुछ सप्ताह का समय और लगेगा। इस 'सप्लाई गैप' का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं, जिससे कीमतों में उछाल आया है।
निर्यात पर बैन हटने की चर्चा: बढ़ी जमाखोरी की आशंका

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पिछले कुछ दिनों से चर्चा है कि सरकार प्याज के निर्यात (Export) पर लगी पाबंदियों में ढील दे सकती है। इस खबर के बाद व्यापारियों ने भारी मात्रा में स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में ऊंचे दामों पर बेच सकें। इस कृत्रिम कमी ने भी बाजार को प्रभावित किया है।
ट्रांसपोर्टेशन की बढ़ती लागत: डीजल के दामों का असर

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वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और डीजल की महंगी दरों ने माल ढुलाई (Logistics) को महंगा कर दिया है। नासिक से दिल्ली या कोलकाता तक प्याज पहुंचाने का खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर रिटेल कीमतों पर पड़ रहा है।
सरकार का एक्शन: बफर स्टॉक से मिलेगी राहत?

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बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार अब अपने बफर स्टॉक से प्याज को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। सहकारी समितियों (जैसे NCCF और NAFED) के जरिए सस्ते दामों पर प्याज बेचने की योजना बनाई जा रही है ताकि आम जनता को राहत मिल सके।